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कक्षा दो तक दो और पांचवीं तक सिर्फ तीन किताबें पढ़ेंगे स्कूली बच्चे

स्कूली बच्चों को बस्ते के बोझ से छुटकारा दिलाने के लिए किताबों की संख्या को सीमित करने के फॉर्मूले पर केंद्र सरकार विचार कर रही है। इसके तहत कक्षा एक एवं दो में सिर्फ दो किताबें तथा तीन से पांच में तीन किताबें ही होंगी।

एनसीईआरटीई ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को बस्ते का बोझ घटाने के लिए यह फॉर्मूला सुझाया है। मंत्रालय राज्यों से विचार-विमर्श कर इसे लागू करेगा। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि बस्ते का बोझ कम करने के लिए सरकार प्रयासरत है। राज्यों ने भी समय-समय पर इस मुद्दे पर अपनी चिंताएं प्रकट की हैं।

टैबलेट देंगे
अभी बच्चों को कक्षा एक से ही चार या इससे अधिक किताबें पढ़नी होती हैं। जावड़ेकर ने कहा कि सीबीएसई की पहल अपने स्कूलों के लिए है। एनसीईआरटी की सिफारिशें देशभर के लिए हैं। केंद्र इस प्रस्ताव को जल्द राज्यों के समक्ष रखेगा। उन्होंने कहा, बस्ते का बोझ कम करने के लिए बच्चों को टैबलेट भी दिए जा रहे हैं। 25 केंद्रीय विद्यालयों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 8वीं से बच्चों को टैबलेट देंगे।

इन्होंने पहल की
कई राज्य बस्ते का बोझ कम करने के लिए प्रयासरत हैं। छत्तीसगढ़ ने बच्चों को किताबों के दो सेट दिए हैं। एक घर तथा एक स्कूल के लिए। इससे उन्हें बस्ता नहीं लाना पड़ता। तमिलनाडु में हर चार माह के लिए छोटी-छोटी किताब छापी गई हैं। महाराष्ट्र में डिजिटल शिक्षा दी जा रही है।

सीबीएसई के ये सुझाव थे
कक्षा एक, दो के छात्रों के बस्ते का वजन दो किलो से ज्यादा नहीं हो
कक्षा तीन-चार के लिए तीन किलो, पांच से आठ के लिए चार किलो हो वजन
कक्षा नौ से 12 के छात्रों के बस्ते भी 6 किलो से अधिक नहीं रखने का निर्देश

बोझ से बीमार होते बच्चे
अमेरिकी शोध के मुताबिक बस्ते का बोझ बच्चे के वजन का 15% या अधिक है, तो उसकी रीढ़, गर्दन की हड्डियों में विकृति आने लगती है
आधे से ज्यादा स्कूली छात्र 14 साल से कम उम्र में पीठ-कमर दर्द, रीढ़ संबंधी बीमारियों, फेफड़ों से जुड़े रोग की समस्या से जूझते हैं

जमीनी हकीकत अलग

10 से 12 किलो तक भारी होते हैं कक्षा पांचवी से 12वीं में पढ़ने वाले बच्चों के बस्ते
इसके अलावा छात्रों को टिफिन बॉक्स, पानी की बोतल आदि अतिरिक्त ढोना पड़ता है

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