छत्तीसगढ़

किसानों को वैज्ञानिको ने दी रबी फसल की तैयारियों की सलाह

रायपुर: कृषि वैज्ञानिकों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों ने सूखे से प्रभावित किसानों को रबी मौसम में उपयुक्त दलहनी, तिलहनी और साग-सब्जियां लगाने के लिए तैयारी करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि, खाद, बीज के साथ-साथ अन्य कृषि आदानों की व्यवस्था करके अक्टूबर माह में सुविधानुसार रबी फसलों की बोआई कर लेनी चाहिए। सूखा प्रभावित किसानों के लिए रबी फसलों के बीजों की निःशुल्क व्यवस्था राज्य शासन की ओर से की गई है।

अभी क्या-क्या करें किसान : 

कृषि वैज्ञानिकों की ओर से जारी विशेष बुलेटिन में कहा गया है कि खरीफ मौसम की धान फसल में तना छेदक कीट की निगरानी के लिए फैरोमॉनट्रैप एक एकड़ में दो तीन जगहों पर उपयोग करना चाहिए। तना छेदक का प्रकोप पाये जाने पर एक एकड़ में आठ से दस फैरोमॉनट्रैप का उपयोग किया जा सकता है। पीला तना छेदक के व्यवस्क कीट खेतों में दिखाई देने पर इनके अण्डों के समूहों सहित पत्तियों को अलग से नष्ट करना जरूरी है। जहां पर इन कीटों का डेड हार्ट बना है, उसे खींच कर अलग कर देना चाहिए ताकि उपस्थित इल्ली परजीवीकृत होकर नष्ट हो जाएं।

किन -किन सब्जियों की डालें नर्सरी : 

कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि, साग-सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को शीतकालीन गोभीवर्गीय सब्जियों जैसे फूलगोभी, पत्तागोभी और गांठगोभी की अगेती किस्मों का चयन कर नर्सरी डालना चाहिए। टमाटर, बैगन , मिर्च और शिमला मिर्च के बीजों को बोने से पहले उपचारित करना चाहिए। बीजों को थायराम एक ग्राम प्रति किलो की दर से उपचारित किया जाना चाहिए। केले की फसल में मिट्टी चढ़ाने का उपयुक्त समय है। पपीता की फसल में हर 15 दिन के अंतराल में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को स्प्रे करने से अच्छी उत्पादकता मिलती है।

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