एसईसीएल के सामने छह माह में 1170 लाख टन उत्पादन की चुनौती

कोरबा Korba News:। चालू वित्तीय वर्ष के छह माह खत्म हो चुके है और साउथ इस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की सभी खदानें अपने उत्पादन लक्ष्य से पिछड़ गई। 668.3 लाख टन कोयला उत्पादन की जगह अभी तक 551.2 लाख टन उत्पादन ही हो सका है। देश में चल रहे कोयला संकट के बीच शेष छह माह में कंपनी को 1170 लाख टन कोयला उत्पादन करने की चुनौती है। एसईसीएल से एक बार पुन: नंबर वन का तमगा छिन सकता है।

एसईसीएल की खदानों से पचास फीसद भी उत्पादन नहीं होेने से न केवल स्थानीय प्रबंधन बल्कि कोल इंडिया के चेयरमैन समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी चिंतित हैं। कंपनी की मेगा परियोजना का लगातार अधिकारियों द्वारा दौरा कर उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, पर सफलता नहीं मिल पा रही है। वित्तीय वर्ष शुरू होने के साथ ही भू-विस्थापितों के आंदोलन की वजह से काम प्रभावित हुआ, तो दूसरी तरफ बारिश ने पूरी कसर निकाल दी। मेगा परियोजना होने की वजह से प्रबंधन को उम्मीद थी कि कंपनी प्रथम छह माह में मिले लक्ष्य को आसानी से पार कर लेगी, पर दुर्भाग्य की बात है कि गेवरा, दीपका व कुसमुंडा जैसी मेगा परियोजना अपने लक्ष्य से काफी पीछे हो गई हैं।

गेवरा को इस वर्ष 475 लाख टन, दीपका को 350, कुसमुंडा को 450 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य मिला हुआ है। इसका 40 फीसद प्रथम छह माह में उत्पादन करना था, पर ऐसा नहीं हो सका। शेष छह माह में पूरा लक्ष्य हासिल करना एक बड़ी चुनौती से कम नही है। कोयला क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि बारिश बंद होने के बाद उत्पादन में बढ़ोत्तरी कर लक्ष्य हासिल किया जाएगा, लेकिन इतने बड़े लक्ष्य को हासिल किस तरह किया जाएगा, इस बारे में कोई भी स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहा है। बताय जा रहा है कि यही स्थिति रही तो एसईसीएल पिछड़ जाएगी और एमसीएल आगे निकल जाएगी।

कोल इंडिया में केवल एमसीएल ने किया लक्ष्य पार

कोल इंडिया से संबद्ध महानदी कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) 663.8 की जगह 707.5 लाख टन उत्पादन कर लक्ष्य पार किया। शेष अन्य कंपनियां चालू वित्तीय वर्ष के खत्म हुए छह माह में अपने लक्ष्य के अनुरूप कोयला उत्पादन नहीं कर सकी। एनसीएल ने 539.8 के एवज में 534.4 व बीसीसीएल ने 125.0 के एवज में 123.7 लाख टन कोयला उत्पादन ही लक्ष्य के करीब रही। जबकि इसीएल में 201.8 की जगह 143.1, सीसीएल 303.5 की जगह 253.6, डब्ल्यूसीएल 203.7 की जगह 184.7, एसईसीएल 668.3 की जगह 551.2 मिलियन टन ही उत्पादन कर सकी।

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