तलाक की याचिका लंबित रहते हुए दूसरी शादी मान्य होगी

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तलाक के एक मामले में नई व्यवस्था दी है। तलाक को लेकर यदि दोनों पक्षो के बीच समझौता हो गया हो तो याचिका लंबित रहते हुए भी दूसरी शादी मान्य है।

कोर्ट ने कहा कि तलाक के खिलाफ दाखिल अपील खारिज होने से पहले दूसरी शादी पर रोक संबंधी प्रावधान तब लागू नहीं होता,जब पक्षकारों ने केस वापस लेने का समझौता कर लिया हो।

गौरतलब है कि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत तलाक के खिलाफ दाखिल लंबित अपील के दौरान दोनों में से किसी भी पार्टी की दूसरी शादी पर रोक है।

हाईकोर्ट ने अमान्य करार दिया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा मत है कि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा-15 के तहत तलाक के खिलाफ लंबित अपील के दौरान दूसरी शादी पर रोक का प्रावधान तब लागू नहीं होता,जब पक्षकारों ने समझौते के आधार पर केस आगे न चलाने का फैसला कर लिया हो।

मौजूदा मामले में तलाक के फैसले के खिलाफ लंबित अपील के दौरान पति ने पहली पत्नी से समझौता कर लिया और केस वापस लेने की अर्जी लगाई और इसी दौरान दूसरी शादी कर ली। हाईकोर्ट ने शादी को अमान्य कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पति की अर्जी स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया।

क्या था मामला

एक मामले में शादी के बाद पत्नी ने तलाक की अर्जी दाखिल की,तीस हजारी कोर्ट ने 31 अगस्त 2009 को पत्नी के फेवर में तलाक की डिक्री पारित कर दी। रमेश ने उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसी बीच दोनों में मुकदमा वापस लेने के बारे में समझौता हो गया।

15 अक्टूबर,2011 को पति ने समझौते के आधार पर अपील वापस लेने की अर्जी दाखिल कर दी। 28 नवंबर 2011 को हाईकोर्ट में मामला दोबारा उठाया गया। 20 दिसंबर 2011 को अर्जी का निपटारा कर दिया गया। लेकिन केस लंबित होने के दौरान छह दिसंबर 2011 को रमेश ने दूसरी शादी कर ली।

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