झारखंड में 22 से 29 अप्रैल का लॉकडाउन का ऐलान

कुछ रियायतों के साथ पूरे राज्य में धारा 144 लागू , जानें गाइडलाइन

रांचीः झारखंड में कोरोना संक्रमण के बढ़ते कहर के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज यह ऐलान किया है कि 22 अप्रैल से 29 अप्रैल तक राज्य में कंप्लीट लॉकडाउन रहेगा।

मुख्यमंत्री आवास में राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह समेत अन्य अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद यह फैसला लिया गया। 22 अप्रैल की शाम 6:30 बजे से लॉकडाउन शुरू हो जाएगा और 29 अप्रैल की शाम 6:30 बजे तक लॉकडाउन रहेगा. राज्य में कई रियायतों के साथ लॉकडाउन लगाया गया है।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मीडिया को बताया कि लॉकडाउन के दौरान ग्रामीण विकास की सभी योजनाएं चलती रहेंगी। सभी प्रकार के निर्माण कार्य चलते रहेंगे। किराना दुकान खुली रहेंगी और आवश्यक सेवाएं भी बहाल रहेंगी। होटल में बैठकर खाने की अनुमति नहीं होगी, लेकिन होटल से घरों तक होम डिलीवरी होगी।

उन्होंने बताया कि पूरे राज्य में धारा 144 लागू की गई है, जिसमें एक साथ पांच से अधिक आदमी दिखे तो कार्रवाई की जायेगी। इस दौरान पशु चारा के आवागमन पर भी रोक नहीं होगा। पुलिस रोकेगी तो सड़क पर निकलने का कारण बताना होगा। सब्जी खरीदना हो या सामान पहुंचाना हो, कारण बताइए और परिचय दिखाइए तभी आगे बढ़िए। इसके साथ ही दवा खरीदने निकले हैं तो डॉक्टर का पर्चा दिखाए।

सब्जी बाजार और गल्ले की दुकानों पर अधिक भीड नहीं लगने पाए। इसका भी ख्याल रखना होगा। फल फूल सब्जियां यथावत बिकती रहेंगी। वहीं, उद्योग और इससे संबंधित सहयोगी इकाइयों पर फिलहाल रोक नहीं है. औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज सामान्य रूप से चलेगा। शारीरिक दूरी और सैनिटाइजेशन का प्रबंध उद्योग घराने करेंगे।

लॉकडाउन के दौरान एक बार फिर गिफ्ट और कपडा की दुकानें, सिनेमा हॉल आदि बंद रहेंगे. यहां बता दें कि झारखंड में कोरोना के बढते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए पिछले दिनों हेमंत सोरेन सरकार ने कडे कदम उठाये थे. इसके तहत अगले आदेश तक सभी स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक संस्थान, कोचिंग सेंटर और आंगनबाड़ी केंद्र बंद करने के आदेश दिये गये थे।

सभी तरह की परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। शादी में भी अब सिर्फ 50 लोग ही शामिल हो सकेंगे। पहले 200 लोगों के शामिल होने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन कोरोना की भयावहता को देखते हुए इसकी सीमा कम कर दी गई है। कोरोना के प्रकोप के बीच झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. जिसमें सभी दलों से लॉकडाउन के मुद्दे पर रायशुमारी की गई थी।

इसके बाद कैबिनेट के मंत्रियों के साथ बैठक कर मुख्यमंत्री ने कुछ पाबंदियां लगाई थीं ताकि कोरोना के तेजी से प्रसार पर रोक लग सके. लेकिन उसके असरकारक नही होते देख सरकार ने आज और कड़े फैसले ले लिये। राज्य में कोरोना का संक्रमण हर दिन नया रिकार्ड बना रहा है। कभी मरीज का रिकार्ड तो कभी मौत का, कभी राज्य तो कभी रांची का रिकार्ड बन रहा है।

संक्रमण की रफ्तार हर दिन नई ऊंचाई छू रही है. स्थिती यह है कि संक्रमण के प्रसार में झारखंड राष्ट्रीय स्तर के सभी मानकों को पीछे छोड दिया है. मृत्यु दर को छोड कर हर स्तर पर राज्य का औसत राष्ट्रीय औसत से काफी आगे निकल चुका है। वैसे ही राज्य की बात करें तो रांची के आंकडे़ राज्य के औसत से काफी आगे निकल चुका है. पिछले पांच दिनों में राज्य में संक्रमण का औसत दर जहां 9.00 प्रतिशत है, रांची का औसत संक्रमण दर 16.00 प्रतिशत है। कोरोना की दूसरी लहर में अभी तक राज्य प्रशासनिक सेवा समेत दूसरी राजपत्रित सेवाओं के दर्जन भर अधिकारी अपनी जान गंवा चुके हैं।

इनमें राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के संयुक्त सचिव रामाशंकर प्रसाद भी शामिल हैं. 18 अप्रैल को राज्य सरकार के कोयला नियंत्रक अशोक तिवारी एवं जलसंसाधन विभाग के अवर सचिव गजेश्वर महतो को भी कोरोना निगल गया। पर्यटन विभाग के उप निदेशक विजय पासवान और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रधान आप्त सचिव अवधेश पासवान की मौत भी पिछले कुछ दिनों के अंतराल पर हुई है. उसीतरह वाणिज्यकर विभाग के राज्य कर उपायुक्त रजनीश समद भी हाल ही में कोरोना के कारण काल की गाल में समा गए हैं।

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता मनोज चौधरी की मौत भी कोरोना के कारण हुई है. गढवा में रमना प्रखंड के अंचलाधिकारी संजीव भारती और रांची जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी रूंगटू लोहरा की मृत्यु के पीछे भी कोरोना कारण बना है। लोहरदगा के जिला खनन पदाधिकारी भोला हरिजन ने भी कोरोना ग्रस्त होकर ही दुनिया को छोड़ दिया।

वहीं, राज्य के चार विधायक भी कोरोना से जूझ रहे हैं। जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय, चंदनक्यारी के विधायक अमर बाऊरी, हटिया के विधायक नवीन जायसवाल और सिंदरी के विधायक इंद्रजीत महतो कोरोना संक्रमण से संक्रमित हो गये हैं. स्थिति गंभीर होने पर इंद्रजीत महतो को तो इलाज के लिए हैदराबाद ले जाया गया है।

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