जिला न्यायालय में महात्मा गांधी के जीवन दर्शन पर विचार गोष्ठी सम्पन्न

मुख्य वक्ता संदीप दुबे ने बताया, गांधी जी ने बैरिस्टर के सफर से आर्थिक सामाजिक लोकतांत्रिक रूप से भारत को आज़ाद कराया और मोहन से महात्मा से राष्ट्रपिता बने

जांजगीर/छत्तीसगढ़ : आज दिनाक 22 जून को जिला न्यायालय जांजगीर के सभाकक्ष में महात्मा गांधी के जीवन दर्शन पर केंद्रित विचार संगोष्ठि का आयोजन वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप दुबे छत्तीसगढ़ उच्चन्यायालय के मुख्य अतिथि व जिला के न्यायाधीश के. आर. रिंगरी,सुरेश जून,जे.एस. पटेल अपर सत्र न्यायाधीश गण, संतोष महोबिया मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, किरण पन्ना न्याययिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, नरेश शर्मा अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ जांजगीर व अधिवक्ताओ सहित न्यायालीन कर्मचारियों के उपस्थिति में सम्पन्न है। कार्यक्रम जिला बार संघ द्वारा आयोजित किया गया।

सर्वप्रथम औपचारिक उद्घाटन के पश्चात , बार के अध्यक्ष नरेश शर्मा ने कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संदीप दुबे का परिचय करवाया। उन्होंने आगे बताया कि जांजगीर बार 100 वर्ष पुराना बार है। उन्होंने अपने उध्बोधन में बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सांसद विवेक तन्खा के कुशल प्रयास से जिला अधिवक्ता संघ को कंप्यूटर और प्रिंटर का नया सेट आज दिया गया। मुख वक्ता संदीप दुबे ने महात्मा गांधी के जीवन दर्शन पर अपना विचार प्रकट करते हुए उनके जीवन मे वकालत के 22 वर्षो को बहुत ही सारगर्भित तरीके से बताया, और कहा कि 1891 में गांधी जी बॉम्बे आकर अपना वकालत प्रारंभ किया,

ट्रेन सफर के दौरान रंगभेद आचरण 

अपने वकालत जीवन के प्रारंभिक समय मे उन्हें बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ा, भारत मे वकालत के पश्चात उन्होंने करीब 22 वर्षो तक दक्षिण अफ्रीका में वकालत की और यही वह समय था ,जब उन्होंने देखा और खयड महसूस किया कि अंग्रेज कैसे प्रवासी भारतीयों सहित जुलु समुदाय ओर अत्यचार कर रहे है , उनके साथ भी ट्रेन सफर के दौरान रंगभेद आचरण के कारण ट्रैन से बाहर फेंक दिया गया, कैसे वहा की सरकार ने अप्रवासी भारतीयों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश की ,कैसे हिन्दू विवाह की अवैध घोषित किया, इन सब कृत्य के विरुद्ध गांधी जी एक वकील के हैसियत से अंग्रेजो से कानूनी लड़ाई लड़ी, जनहित याचिका लगाई।

जिला न्यायालय में महात्मा गांधी के जीवन दर्शन पर विचार गोष्ठी सम्पन्नऔर मजदूरों को जुल्मो से बचाया, अपने उद्बोधन में दुबे ने सभी अधिवक्ताओ से अपील की की महात्मा के संघर्षो को अपने जीवन मे स्थान दे, अनुसरण करें । उक्त कार्यक्रम में आभार संघ के सचिव योगेश गोपाल ने किया।उक्त कार्यक्रम में अकलतरा अधिवक्ता संघ के धनराज सिंह चौहान , वरिष्ठ अधिवक्ता कमलेश सिंह, रेवतीरमण तिवारी, गणेश गुजराल, संघ के कोषाध्यक्ष दीपक राठौड़, शुश्री शशिकांता राठौर, रामकुमार राठौर , राजेश पांडेय लोक अभियोजक, बालकृष्ण मिश्रा, रेणुका बाला दुबे, शिवबिहारी शर्मा, सुरेश चंदेल, सीताराम राठौड़। कार्यक्रम का संचालन कमलेश मिश्रा ने किया।

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