बिलासपुर प्रेस क्लब के पहुना बने आईजी प्रदीप गुप्ता क्राइम पेट्रोल जैसे सीरियल का समाज में दुष्प्रभाव

- मनमोहन पात्रे

बिलासपुर: बिलासपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित हमर पहुना कार्यक्रम में पहुचे बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक प्रदीप गुप्ता ने कहा कि क्राइम पेट्रोल जैसे सीरियल समाज के लिए ठीक नहीं है, इसका समाज में दुष्प्रभाव अधिक पड रहा है। बढते अपराधों के रोकथाम के संबंध में बताया कि हर थाने की एक क्षमता होती है।

साल में कम से कम 300 ही अपराध थाने में दर्ज होने चाहिए, उससे अधिक अपराध दर्ज होने पर थाने की साथ बल की संख्या बढाई जानी चाहिए। उन्होंने हर नागरिक को कानून की पढाई करने का सलाह देते हुए कहा कि सभी को कानून की जानकारी होनी चाहिए। आजादी की लडाई में शामिल या किसी में क्षेत्र में अधिकांश सफल व्यक्ति ने कानून की पढाई की है।

हमर पहुना कार्यक्रम में पहुंचे आईजी प्रदीप गुप्ता का सबसे पहले बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष तिलकराज सलूजा, वरिष्ठ पत्रकार राजेश अग्रवाल, कमल दुबे, विरेंद्र गहवई, कृष्णा तंबोली ने पुष्प गुच्छ भेंटकर स्वागत किया। इसके बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1995 बेंच के अधिकारी है। उन्होंने स्कूली शिक्षा रायपुर और काॅलेज की पढाई नईदिल्ली, हैदराबाद और नागपुर से की।

आईजी गुप्ता ने बताया कि नौकरी शुरूआत महाकाल की नगरी उज्जैन से की। वे ग्वालियर, सागर, जांजगीर, जशपुर, बिलासपुर, रायपुर, कांकेर और भिलाई में पदस्त रहे। बातचीत के दौरान गुप्ता ने कहा कि क्राइम पेट्रोल, सीआईडी, सावधान इंडिया जैसे सीरियलों का समाज में सकारात्मक से कहीं अधिक नकारात्मक प्रभाव पड रहा है।

ऐसे कार्यक्रम से लोग सतर्क हो रहे है, लेकिन दूसरी ओर कहीं ना कहीं ये अपराधों को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा भी दे रहे है। इनसे अपराध करने के नए- नए तरीके पता चलते है। विदेश और देश कानून व्यवस्था के संबंध में आईजी गुप्ता ने बताया कि विदेशों में कानून, नियम सर्वोपरि है, जबकि भारत में समाजिक दायित्च सर्वोपरि है। चर्चा के दौरान उन्होने बताया कि किसी भी थाने में साल में अपराध की संख्या 300 से अधिक नहीं होनी चाहिए। बिलासपुर रेंज में नए थाने और बल की कमी है।

सीविल लाइन, सरकंडा जैसे थाना क्षेत्र में नए थाने की जरूरत है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उन्होंने अपने कार्यकाल के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि भिलाई में घटित अभिषेक मिश्रा हत्याकांड बहुत ही चुनौतीपूर्ण था। इस हत्याकांड को अपराधियों ने फिल्म दृष्यंम की तर्ज पर अंजाम दिया था। इस तरह उन्होंने फिल्म स्पेशल 26 के तर्ज पर घटित एक और घटना को सुझाने में अपने अनुभव को साझा किया।

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