सेवा समर्पण- सुशासन के 20 साल, आशियाने के सपने अब हो रहे साकार

आपने हरे, पीले और काले रंग का ऑटो तो सड़कों पर देखा होगा पर शायद ही गुलाबी रंग का देखा हो। ऑटो का गुलाबी रंग महज एक रंग नहीं बल्कि जिंदगी के रंग बदलने की कहानी है। ऑटो के साथ-साथ ड्राइवर के लिबास भी गुलाबी हैं, जो परिवहन विभाग की विलक्षणता बयां करते हैं और मुशाफ़िरों में नया रंग भी भरते हैं। हाथों में ऑटो की स्टेरिंग थामकर सड़कों पर फर्राटा भर रही बबीता गुप्ता शहरीकरण में महिला सशक्तिकरण की झंडाबरदार हैं। बबीता समेत अनेक महिलाओं को सरकार से ऑटो का तौहफा मिला है। जिसने उसनकी अंधियारी जिंदगी में रोशनी भर दी। बबीता 20-25 हजार रुपए कमाती हैं। पहले किराये का घर था अब अपना आशियाना है। बच्चों की अच्छी परवरिश के साथ-साथ उन्हें बेहतर स्कूलों में तालीम दिलाने की चाहत भी पूरी हो रही है सो अलग। ये सब हो पा रहा है पीएम मोदी की दूरदर्शी सोच के कारण।

महिलाओं ने बदली तस्वीर

बबीता अपनी कहानी सुनाते हुए बताती हैं, ‘ये ऑटो हमें केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से मिली है। पहले हम कंपनी में जाते थे वहां 10-15 हजार मिलते थे और उसके लिए वो लोग बहुत घुमाते थे। ये रिक्शा चलाते हुए मुझे 4 साल 6 महीने हुआ है और हमने अपना घर ले लिया है साथ ही मैं हर दिन 1000-1200 से कमा लेती हूँ। इससे मेरी जिंदगी पूरी बदल गई है। पहले हम किरायेदार थे अब हमारा खुद का मकान है। बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा पा रहे हैं। हमें ऑटो से बहुत मदद मिली है।’ अब वो दिन लद गए जब महिलाओं पर घर की दहलीज को पारने पर कड़ा पहरा लगा होता था या महिलायें घर से नियकलने में खुद सकुचाती थीं। अब महिलायें देर रात तक सूरत समेत अनेक शहरों में ऑटो रिक्शा चला रही हैं। और शहर की तरक्की की इबारत लिख रही हैं। ये संभव हो पाया है सेवा समर्पण और सुशासन के 20 साल के सफर की वजह से।

पीएम ने गुजरात से लेकर देश में बुना विकास का ताना-बाना

गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक के सफर में पीएम मोदी ने विकास का ताना-बाना बुना। इसकी खूबसूरत झलक पहले गुजरात के विकास मॉडल में देखी गई और अब पूरा देश गुजरात के विकास के मॉडल को अपनाकर नया कीर्तिमान गढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में प्रचंड बहुमत से केंद्र की सत्ता में आते ही गरीबों के प्रति जो अपनी प्रतिबद्धता दिखलाई थी उसी का नतीजा है कि समाज के हाशिये पर पड़े लोग भी अब समाज की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

पीएम मोदी के विजन से गरीबों के सपने हुए सच

पीएम की मेहनत का नतीजा है कि अब मजदूर और गरीब को अपने पसीने की पूरी कीमत मिल रही है और वो शहरीकरण में शामिल हो रहे हैं। और उनकी अपनी दुनिया भी आबाद हो रही है। आम हो या खास एक अदद आशियाने की तलाश हर किसी को होती है। खासकर मध्यवर्ग के बाशिंदे सालों-साल आशियाने के सपने संजोते हैं। कुछ साकार होते हैं और कुछेक सपने टूट भी जाते हैं। समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति के लिए मकान की हसरत किसी स्वपन से कम नहीं है। लेकिन पीएम मोदी ने गरीबों के सपनों को पंख लगाए और उन्हें सच करने में सहयोग किया। ये संभव हो पाया पीएम मोदी के विजन से जिन्होंने ये आस जगाई कि अब देश के गरीबों के भी पक्के मकान बनेंगे। पीएम मोदी का सपना है कि साल 2022 तक देश के गरीबों को पक्का मकान मुहैया हो। आजादी के 75 साल पर सरकार हर सर पर छत देने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) गरीबों के लिए उम्मीद की किरण बन कर आया है। पहले इस योजना का लाभ गांवों को मिलता था अब इसकी धमक शहरों में भी पहुंच गई है।

यूपी है शीर्ष पर

आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय (MoHUPA) द्वारा शुरू किये गए प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) कार्यक्रम में मिशन 2022 तक ‘सभी के लिए घर’ Housing for All का प्रावधान शामिल है। PMAY (शहरी) के तहत स्वीकृत मकानों की संख्या अब 83.62 लाख है। उत्तर प्रदेश 13 लाख स्वीकृत घरों के साथ सूची में सबसे शीर्ष पर है।

तीन चरणों में बांटा गया है योजना को

इस योजना के लाभार्थी गरीब हैं और देश में EWS और LIG श्रेणियों के तहत रहने वाले लोग हैं। योजना को तीन चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में, अप्रैल 2015 से मार्च 2017 तक कुल 100 शहरों को कवर किया गया। दूसरे चरण में, अप्रैल 2017 से मार्च 2019 तक 200 शहरों को कवर किया गया। तीसरे चरण में, अप्रैल 2019 से मार्च 2022 तक बचे हुए शहरों को कवर किया जाएगा।

सरकार दे रही है हर संभव मदद

सरकार आवास ऋण पर 6.5% की ब्याज सब्सिडी प्रदान कर रही है जिसका लाभ लाभार्थियों को ऋण की तारीख शुरू होने से 15 साल तक मिल सकता है। सरकार, योजना के सभी लाभार्थियों को 1 लाख रुपये का अनुदान देगी। इसके अलावा, उन सभी पात्र शहरी गरीबों को 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे जो शहरी क्षेत्रों में अपने घर बनाना चाहते हैं या अपने मौजूदा घरों में नवीकरण की योजना बना रहे हैं। मौजूदा घरों में शौचालय बनाने के लिए भी इस योजना के तहत ऋण का लाभ उठाया जा सकता है।

गरीबों को मिला रोजगार भी

PMAY-U एक गुणी चक्र की स्थापना करके कई क्षेत्रों के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करता है। एक करोड़ घरों का मतलब होगा 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का गृह ऋण, और 80-100 मिलियन टन सीमेंट और 10-15 मिलियन टन स्टील की बढ़ती खपत। PMAY-U के सम्पूर्ण निर्माण अवसर लगभग चार बिलियन वर्ग फुट की है और यह सभी निष्पादन अवधि में 9-10 करोड़ नौकरियों को पैदा करेगा।

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