सेवा समर्पण- सुशासन के 20 साल, गरीबों के कल्याण की कोशिशें हुईं तेज

पीएम मोदी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बोलते हैं कि ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना के माध्यम से हम देश के गरीब से गरीब लोगों को बैंक अकाउंट की सुविधा से जोड़ना चाहते हैं। आज करोड़ों-करोड़ परिवार हैं जिनके पास मोबाईल फोन तो हैं लेकिन बैंक अकाउंट नहीं है और इसलिए प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत जो अकाउंट खोलेगा उसे डेबिट कार्ड दिया जाएगा। डेबिट कार्ड के साथ हर गरीब परिवार को एक लाख रुपये का बीमा सुनिश्चित कर दिया जाएगा ताकि उसके जीवन पर कोई संकट आया तो उनके परिवार जनों को एक लाख रुपये का बीमा मिल सके।’ लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री की इस घोषणा में गरीब किसानों और मजदूरों का दर्द था।

बिचौलियों से मिली मुक्ति

बैंक खाते नहीं होने से गरीब लोग कर्ज में डूबे रहते थे। ब्याज की चकरा देने वाली गणित जीना मुश्किल कर देती थी। कर्ज चुकाते-चुकाते अपनी ही कमाई की कमर टूट जाती थी, लेकिन ब्याज चुकता नहीं हो पाता था। ईज़ ऑफ लिविंग के जरिए पीएम मोदी ने नए भारत की मजबूत नींव रखी। देश की गरीब जनता को कर्ज से मुक्ति दी। बैंक खातों से जोड़ने के लिए जनधन योजना की शुरूआत की। इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक भारतीय का बैंक खाता खोलना था। बैंक खाता खुलने से सरकारी योजनाओं का भुगतान सीधे गरीबों के खाते में पहुँचने लगा। इसके पीछे कोशिश थी की गरीब जनता का एक रुपया भी कोई बिचौलिया न हड़प सके। इतना ही नहीं बैंक खातों के खुलने से आर्थिक ही नहीं सामाजिक स्तर पर भी काफी मजबूती मिली है। लाभार्थी कहते हैं जैसे उज्जवला योजना का सब्सिडी हुआ, किसान सम्मान निधि का पैसा हुआ वो सीधे हमारे खाते में आने लगा। तो बीच-बिचौलिये जो कभी प्रधान थे, लेखपाल थे योजना का लाभ देने के बदले में आधा पैसा मांगते थे वो सब अपने आप बंद हो गया।

स्व-रोजगार के अवसर बड़े

मुद्रा जैसी योजनाओं से रोजगार के नए अवसर खुले हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना महिला सशक्तिकरण में भी सफल हो रही है। इस योजना के मदद से गृहणियां अपने उद्यम कौशल के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं। लाभार्थी संजना कहती हैं कि पीएम मुद्रा योजनाके तहत उन्हें 2 लाख का लोन मिला है। सिर्फ पेपर वर्क करने के बाद उन्हें यह लोन आसानी से मिल गया। जिससे अब वह और सिलाई मशीन और कच्चा माल खरीद सकती हैं और अपने काम को बड़ा सकती हैं।

मुद्रा योजना के आंकड़े क्या कहते है?

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 2,82,594.30 करोड़ रुपये बतौर क़र्ज़ दिए गए। इनमें से 46 फीसदी राशि शिशु लोन के तहत, 32 फीसदी किशोर और 22 फीसदी तरुण कैटिगरी के तहत दिया गया। इन अकाउंट्स में से महिला कर्जदारों की संख्या 340.45 लाख और एससी/एसटी/ओबीसी कर्जदारों की संख्या 259.71 लाख है। वहीं डेटा से पता चलता है कि नए कारोबारियों की संख्या 107.57 लाख रही। मुद्रा योजना के तहत महिला लाभार्थियों की हिस्सेदारी क़रीब 75फीसदी है। इनमें से आधी से अधिक महिलाएं समाज के पिछड़े तबके से आती हैं।
महिलाओं को मिली धुएं से मुक्ति

1 मई 2016 को शुरू हुई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने देश की एपीएल और बीपीएल कार्ड धारी महिलाओं को मिट्टी के चूल्हे से आजादी दिलाई। धुआं मुक्त रसोई उपलब्ध करने के लिए पीएम मोदी ने देश की करोड़ों महिलाओं मुफ्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए। इस योजना का लक्ष्य महिलाओं को सशक्त बनाना और उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना, भारत में अशुद्ध खाना पकाने के ईंधन के कारण होने वाली मौतों की संख्या को कम करना और घर के अंदर जीवाश्म ईंधन जलाने से वायु प्रदूषण के कारण छोटे बच्चों को होने वाली श्वास संबंधी गंभीर बीमारियों से बचाना। जिसमें योजना सफल रही है। इसी को देखते हुए इसी साल उज्ज्वला योजना का दूसरा चरण शुरू किया।

8 करोड़ से अधिक लोगों को मिला कनेक्शन

उज्ज्वला योजना के पहले चरण में दलित और आदिवासी समुदायों सहित 8 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन दिये गए। देश में रसोई गैस के बुनियादी ढाँचे का कई गुना विस्तार हुआ है। पिछले छह वर्षों में देश भर में 11,000 से अधिक नए एलपीजी वितरण केंद्र खोले गए हैं।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना

कोरोना संकट के बीच केंद्र सरकार ने गरीब परिवारों को बड़ी राहत दी है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत देश की 80 करोड़ आबादी को फ्री राशन अब नवंबर 2021 तक मिलता रहेगा। इस पर प्रधानमंत्री कहते हैं कि भारत ने महामारी की आहट के पहले दिन से ही इस संकट को पहचाना और इसपर काम किया। इसलिए आज दुनिया भर में इस योजना की प्रशंसा हो रही है और बड़े बड़े एक्सपर्ट कह रहे हैं कि भारत अपने 80 करोड़ से अधिक लोगों को इस महामारी के दौरान मुफ्त अनाज उपलब्ध करवा रहा है। यह काबिले तारीफ है। योजना के तहत प्रत्येक व्यक्ति को ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ (National Food Security Act- NFSA) के तहत प्रदान किये 5 किलो अनुदानित अनाज (गेहूं या चावल) के अलावा 5 किलोग्राम मुक्त खाद्यान्न प्रदान किया जाएगा। क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार, लाभार्थियों को मुफ्त में 1 किलो दाल भी प्रदान की गई है।

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