सेवा समर्पण- सुशासन के 20 साल, किसान हो रहा है खुशहाल

कोविड महामारी में बहुतों का कामकाज प्रभावित हुआ लेकिन कहते हैं न कि जहां चाह वहां राह। मेगाहले के उमित गांव के किसान किनशेव दपसुख ने जैविक खेती करके यह दिखा दिया कि मुश्किलें कितनी भी हो, हौसला हो तो सब आसान हो जाता है। किनशेव कहते हैं कि मैं जैविक मक्के की खेती करता हूँ। ये काफी फायदेमंद हैं इसका स्वाद भी आम मक्के की तुलना में ज्यादा मीठा और स्वादिष्ट है। किसान अब धीरे-धीरे जैविक खेती की ओर रुख कर रहे हैं।

किनशेव अपने इलाके में स्वीट कॉर्न किसान के नाम से मशहूर हैं। किनशेव को जैविक खेती की प्रेरणा अपने पूर्वजों से मिली। किनशेव के काम से अन्य किसान भी प्रभावित हो रहे हैं। किनशेव अब अपनी फसल की मार्केटिंग भी खूब करते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए ही वह अपने ग्राहकों से जुड़ते हैं। किनशेव को भारत सरकार ने 2019 में सम्मानित भी किया। किनशेव जैसे किसान देश के बाकि किसानों के लिए रोल मॉडल हैं।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि किसानों के लिए बहुत बड़ा सहारा साबित हुई। कोरोना काल में तो यह किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। खास बात ये है कि यह राशि किसानों के खातों में सीधे आती है। न बिचौलियों का झंझट, न दफ्तरों का चक्कर। फोन पर एक मैसेज किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला देता है। बरेली के किसानों के बयान सबकुछ बयां कर रहे हैं। स्थानीय किसान बताते हैं कि इससे उन्हें आर्थिक रूप से काफी सहारा मिला है। किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत एक किसान को साल में 6 हजार रुपये दिए जाते हैं। सरकार का ध्यान लगातार इसपर बना हुआ है कि कोई किसान इस योजना से छूट न पाए। बरेली के किसानों जैसा ही अनुभव बलरामपुर के किसानों का भी है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत पहली बार में 12 करोड़ छोटे तथा सीमांत किसानों को शामिल किया गया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के जरिए 2.25 करोड़ लाभार्थी किसानों को 31 मार्च 2019 को सीधे बैंक ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से पहली किस्त जारी की गई थी। उसके बाद से अबतक कुछ 7 किस्तें जारी हो चुकी हैं। किसानों के लिए महामारी के बीच में भी किस्तें जारी की गई हैं, जिससे उन्हें काफी राहत मिली है।

किसानों की उन्नति से है देश की उन्नति

महात्मा गांधी ने कहा था कि इस देश की उन्नति तभी संभव है, जब इस देश के किसानों की उन्नति हो। वर्तमान सरकार ने इसी को ध्येय वाक्य मानते हुए किसानों की उन्नति पर ध्यान केंद्रित किया है। इसी का नतीजा है कि आज भारत का प्रदर्शन कृषि के क्षेत्र में दुनिया के स्तर पर पहचान बना रहा है। इसका जिक्र कल प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में भी किया, उन्होंने महामारी में अधिक उपज के लिए किसानों की सराहना भी की। केंद्र सरकार ने पिछले 7 साल में किसानों की आय को दोगुना करने के लिए कई प्रयास किए हैं।

ई-नाम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म

राष्ट्रीय कृषि बाजार(ई एनएएम) एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है, जो मौजूदा एपीएमसी मंडियों के नेटवर्क से कृषि संबंधित उपायों के लिए राष्ट्रीय बाजार के रूप में बनाया गया। ई-नाम का कवरेज आज बढ़कर 1 हजार एपीएमसी बाजारों और एफपीओ ( फार्मर ऑर्गनाईजेशन) के संग्रह पॉइंट तक पहुंचा है। लॉजिस्टिक सेवाओं तक डिजिटल पहुंच में सुधार के लिए ‘किसान रथ’ मोबाइल एप भी लॉन्च किया गया। इस एप पर 30 अप्रैल तक 1,73,13,301 सेवा प्रदाता, व्यापारी, एफपीओ किसान और कमीशन एजेंट रजिस्टर्ड हो चुके हैं। इसके माध्यम से देशभर के किसान पूरे देश में अपने कृषि उत्पादों को खरीद-बेच सकते हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत देश के किसानों को किसी भी प्राकृतिक आपदा के कारण फसल में बर्बादी होने पर बीमा प्रदान किया जाता। इस योजना का क्रियान्वयन भारतीय कृषि बीमा कंपनियों द्वारा किया जाता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में केवल प्राकृतिक आपदा जैसे कि सूखा पड़ना, ओले पड़ना आदि शामिल है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा 8,800 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को खरीफ फसल का 2% और रबी फसल का 1.5% भुगतान बीमा कंपनी को करना होता, जिस पर उन्हें बीमा प्रदान किया जाता है। इस योजना के तहत अतिरिक्त प्रीमियम की राशि राज्य एवं भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाती है और पूर्वोत्तर राज्यों में 90 फीसदी प्रीमियम की राशि भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। इस योजना में बुवाई के पहले से लेकर कटाई के बाद तक का पूरा समय शामिल किया गया है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना

10 सितंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल माध्यम से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) का शुभारंभ किया था। PMMSY मत्स्य क्षेत्र पर केंद्रित एक सतत् विकास योजना है, जिसे आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक सभी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में कार्यान्वित किया जाना है। इस योजना पर अनुमानित 20,050 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। इस योजना का लक्ष्य वर्ष 2024-25 तक मत्स्य उत्पादन में अतिरिक्त 70 लाख टन की वृद्धि करना और मत्स्य निर्यात से होने वाली आय को 1,00,000 करोड़ रुपए तक पहुंचाना है। साथ ही इसके माध्यम से मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय को दोगुनी करना और मत्स्य पालन क्षेत्र में 55 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करना प्रमुख उद्देश्य हैं।

आजादी के बाद से ही देश में किसानों की उपेक्षा होती आई है। वर्तमान सरकार ने इस हालत को बदलने की ठानी और पिछले सात साल से इस दिशा में एक से बढ़कर एक कदम उठाए हैं। इससे किसानों को न सिर्फ आर्थिक मदद मिली बल्कि सामाजिक रूप से भी सशक्त हुए हैं।

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