सेवा समर्पण- सुशासन के 20 साल, डिजिटल होता जा रहा है भारत

झारखंड राज्य के राएडी ब्लॉक का गुमला गांव, आजादी के बाद साल 2014 तक यहां मोबाईल टावर का होना तो दूर, लोग इस गांव में जाना तक पसंद नहीं करते थे। विकास की बात तो दूर, इस क्षेत्र से बीएसएफ़ और सीआरपीएफ पर हमले की खबरे हीं आती थीं। गुमला गांव की तरह 10 राज्य के 100 के आसपास के जिले नक्सल की समस्या से जूझ रहे थे। लेकिन अगस्त 2014 के बाद ऐसा कुछ हुआ जिसने इस क्षेत्र की तस्वीर बदल कर रख दी। ये डिजिटल इंडिया का प्रोजेक्ट था। ये मुश्किल इलाकों में मोबाईल टावर लगाने का दुनिया का सबसे महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट था।

ये टावर पूरी तरह से ग्रीन टेक्नॉलजी का इस्तेमाल कर स्थापित किए गए। पूरी तरह सोलर पवार पर चलने वाले ये टावर बिना किसी पवार सप्लाइ के 7 दिनों तक लगातार काम कर सकते हैं। जाहिर तौर पर मोबाईल पहुँचने से यहां के लोगों की गिंदगी पर सकारात्मक असर पड़ा। ग्रामीण जन कहते हैं कि मोबाईल होने से अब कई तरह की परेशानियां खत्म हो गईं हैं। जैसे कोई कब तक लौटेगा, किसी आपात स्थिति में सूचना पहुंचाना आदि। इन इलाकों में रहने वाले सुरक्षाकर्मियों को भी इन टावरों से लाभ हुआ है।

उत्तर-पूर्वी राज्य और लद्दाख तथा जम्मू कश्मीर को मिला बड़ा फायदा

वहीं उत्तर पूर्वी राज्यों में डिजिटल इंडिया के लिए सबसे मुश्किल इलाके रहे अरुणाचल प्रदेश में। यहां भी मोबाईल पहुंचने के बाद की जिंदगी ज्यादा आसान हुई। ई- गवर्नन्स यहां के लोगों की पहुँच में आया। सरकार और जनता की बीच की दूरी कम हुई और लोग अपनों के ज्यादा करीब आए। उत्तर-पूर्व में कनेक्टिविटी के बाद अब सरकार का फोकस अंडमान निकोबार में ऑप्टिकल फाइबर की सुविधा लगाने और लद्दाख, जम्मू कश्मीर के 354 सीमावर्ती गांवों में एक एक मोबाईल टावर लगाने पर है, जो इस डिजिटल इंडिया मिशन की बड़ी सफलता है।

डिजिटल इंडिया का क्या है मतलब

पीएम मोदी डिजिटल इंडिया के बारे में कहते हैं कि डिजिटल इंडिया मतलब सबको सुविधा, सबको अवसर और सबकी भागीदारी। पीएम मोदी आगे कहते हैं कि डिजिटल इंडिया यानि सरकारी तंत्र तक हर किसी की पहुंच। डिजिटल इंडिया यानि पारदर्शी, भेदभावरहित व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर चोट। डिजिटल इंडिया यानि तेजी से लाभ और पूरा लाभ। डिजिटल इंडिया यानि मिनीमम गवरनेंट मेक्सिमम गवर्नेंस। आखिरकार रेड़ी पटरी वालों ने कब सोचा था कि वो बैंकिंग सिस्टम के साथ जुड़ेंगे और उनको भी बैंक से आसान और सस्ता कर्ज मिल पाएगा।

देश में बुजुर्गों, किसानों ने कब सोचा था कि उनको सरकारी योजना का लाभ आसानी से मिल पाएगा। लाभार्थी बताते हैं कि डिजिटल इंडिया के वजह से खाद्यान में भ्रष्टाचार बंद होगया है और अब आराम से मिल जाता है। कोरोना जैसे बुरे समय में भी सभी को आराम से राशन मिला। देश के युवाओं नए कब कल्पना की थी कि उनकी जिंदगी इतनी आसान हो सकती है। कोरोना महामारी के दौरान तो डिजिटल इंडिया का लिटमस टेस्ट हुआ। ऐसे समय में जब आप किसी को छू नही सकते ऐसे में डिजिटल इंडिया ही लोगों के लिए सहारा बना।

गुजरात से ही शुरू हो गया था डिजिटल आंदोलन

दुनिया में सबसे ज्यादा युवाओं वाले देश के साथ संपर्क साधने के लिए तकनीक कितनी जरूरी है इस भूमिका का अभ्यास साल 2001 से पहले ही नरेंद्र मोदी को हो चुका था। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए कंप्युटर, इंटरनेट, इनफॉर्मेशन टेक्नॉलजी इन सबका जनता के फायदे के लिए खूब इस्तेमाल किया गया। आज जिस डिजिटल इंडिया की तस्वीर हम सबके सामने हैं, राजनीतिक तौर पर उसकी शुरूआत 20 साल पहले ही गुजरात में नरेंद्र मोदी ने कर दी थी। 2001 में भूकंप की वजह कच्छ और भुज में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप्प हो गई। इस जरूरी समय में भुज का संपर्क गांधीनगर से नही हो पा रहा था। इसकी वजह से जनता को हो रही परेशानियों का मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी को बखूबी अनुमान था। इसके बाद संचार का ये संकट दोबारा न हो नरेंद्र मोदी ने इसपर काम किया और राज्य को 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली संचार सेवा से जोड़ा।

6 साल से अधिक समय हुआ डिजिटल इंडिया को शुरू हुए

1 जुलाई 2015 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी पहल, डिजिटल इंडिया (Digital India) ने इतने वर्षों में एक क्रांति का रूप ले लिया और आज यह कदम जन-आंदोलन में बदल गया है। डिजिटल इंडिया इस साल 1 जुलाई, 2021 को 6 साल का हो चुका है। ‘डिजिटल इंडिया’ रूपी इस जन-आंदोलन ने अधिकांश लोगों के जीवन में किसी न किसी तरह अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

डिजिटल इंडिया होगा एक सशक्त राष्ट्र

भारत, जहां टेक्नोलॉजी, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और कृषि के लिए बेहतर सेवाओं तक पहुंच को सक्षम बनाती है साथ में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मददगार है। मोबाइल फोन पर सेवाएं देना और सभी के लिए ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना आज एक वास्तविकता है, जिसके आधार पर न्यूनतम गवर्नेंस का सपना साकार हो रहा है। आधार, यूपीआई और डिजी लॉकर जैसी पहलों का कार्यान्वयन फेसलेस, कैशलेस और पेपरलेस गवर्नेंस सुनिश्चित कर रहा है जिसने एक मजबूत और सुरक्षित डिजिटल इंडिया की नींव रखी है। डिजिटल इंडिया, भारत को अधिक डिजिटल रूप से सशक्त राष्ट्र की ओर ले जाने में मदद करने के लिए डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल सेवाओं और डिजिटल समावेशन को सक्षम कर रहा है।

डिजिटल इंडिया के नौ स्तम्भ

मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए सार्वभौमिक पहुँच
पब्लिक इंटरनेट एक्सेस कार्यक्रम
ई-गवर्नेंस – प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकार में सुधार
ई-क्रांति – सेवाओं की इलेक्ट्रानिक डिलीवरी
सभी के लिए सूचना
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण
नौकरियों के लिए आईटी
अर्ली हार्वेस्ट कार्यक्रम

इस माध्यमों से हो रहा है इंडिया डिजिटल

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने आधार, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, कॉमन सर्विस सेंटर, डिजीलॉकर, मोबाइल आधारित उमंग (UMANG) सेवाएँ, MyGov के माध्यम से शासन में भागीदारी, आयुष्मान भारत, ई-अस्पताल, पीएम-किसान, ई-नाम, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, स्वयं (SWAYAM), स्वयं प्रभा (SWAYAM PRABHA), राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल, ई-पाठशाला आदि के माध्यम से भारतीय नागरिकों के जीवन के सभी पहलुओं को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। ‘राष्ट्रीय AI पोर्टल’ (National AI Portal) और ‘युवाओं के लिये जिम्मेदार AI’ (Responsible AI for Youth) को हाल ही में एआई-संचालित भविष्य की नींव रखने के लिये शुरू किया गया।

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