सेवा समर्पण- सुशासन के 20 साल, स्वच्छता की ओर बढ़ता हुआ भारत

भारत का स्वच्छता अभियान आम लोगों की भागीदारी से जन आन्दोलन बन गया, ठीक उसी तरह जिस प्रकार महात्मा गांधी जी ने चरखा चलाते हुए लोगों को स्वराज्य से जोड़ा। एक आंदोलन खड़ा हुआ और अंग्रेजी हुकूमत को भारत छोड़कर जाना पड़ा। स्वच्छ भारत अभियान, स्वतंत्र भारत क एकलौता मिशन साबित हुआ जिसने देशवासियों में गंदगी से लादने की भावना विकसित की। इस कार्यक्रम ने लोगों के व्यवहार में बदलाव लाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व ने अपार विश्वास का एक ऐसा माहौल तैयार किया कि आज पूरा देश खुले में शौच से मुक्त हो गया। 2014 में केंद्र में सत्ता में आते ही पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार ने ये लक्ष्य तय किया। उस समय पीएम मोदी ने लाल किले से कहा था कि गरीब आदमी की इज्जत यही से शुरू होती है, जब वो खुले में शौच से मुक्त होंगे। बच्चियों के लिए अलग शौचालय होंगे, जिससे उन्हें स्कूल को छोड़कर नहीं जाना पड़ेगा।

पीएम के संकल्प से मिली लोगों को ताकत

स्वच्छ भारत अभियान को प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व और नेतृत्व ने ताकत दी, जब लोगों ने देखा कि उनका पीएम खुद झाड़ू उठा कर सफाई पर निकाल पड़ा है। तब पूरादेश हाथ से हाथ मिलाकर चल पड़ा। एक से दो, दो से चार और फिर लाखों हाथ उठ खड़े हुए। गंदगी मिटने लगी। देश स्वच्छता की और चल पड़ा। पीएम मोदी ने आलोचकों की परवाह किए वगैर गांव-गरीब की इस मूल समस्या को मिटाने का संकल्प लिया।

पीएम मोदी कहते हैं कि महिलाओं का सम्मान करना क्या हमारी जिम्मेदारी नहीं है। महिलाएं शौच के लिए अंधेरे का इंतजार करती हैं। इससे न सिर्फ उन्हें पीड़ा झेलने पड़ती है बल्कि यह न जाने कितनी बीमारियों की जड़ है।पीएम आगे कहते हैं कि क्या हम उनके लिए शौचालय का प्रबंध नहीं कर सकते हैं।

5 साल में ही भारत हुआ खुले में शौच से मुक्त

स्वच्छता अभियान को सफल बनाने में सबसे अधिक योगदान स्वच्छाग्राहियों का रहा है। देशभर से हजारों-लाखों पुरुष, महिलाएं आगे आए। प्रयागराज में हुए कुम्भ में सभी ने स्वच्छता की बानगी देखी। पीएम मोदी स्वच्छाहिग्राहियों के प्रदर्शन से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने प्रयागराज में सफाई कर्मचारियों के पैर खुद अपने हाथों से धुले। उनके योगदान को सहाराने का यह तरीका था।

देश का प्रधान सेवक मानवसेवा से जुड़े लोगों को सम्मान दे रहा था तब पूरा विश्व ठहरा हुआ देख रहा था। खुले में शौच से मुक्त का लक्ष्य, विश्व ने 2030 तक रखा था लेकिन भारत ने यह लक्ष्य महज 2019 में ही हासिल कर लिया। 2014 देश में करीब 38% शौचालय थे, 2019 आते-आते पूरे देश में शौचालय बन गए। भारत की इस उपलब्धि से प्रभावित होकर बिल एण्ड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने प्रधानमंत्री को अंतरराष्ट्रीय गोलकीपर अवॉर्ड से नवाजा।

लाखों जिंदगियों के लिए वरदान बना स्वच्छता मिशन

स्वच्छ भारत मिशन लाखों लोगों की जिंदगियों के बचने का माध्यम बना है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक स्वच्छ भारत की वजह से 3 लाख जिंदगियों को बचाने की संभावना बनी है। इसी तरह यूनिसेफ ने अनुमान लगाया है कि गांव में रहने वाला हर परिवार जो अपने घर में शौचालय बनवा रहा है उसे कम से कम 50 हजार रुपये कि बचत हो रही है। यह मिशन संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्यों को भी प्राप्त करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

देश भर शुरू हुई सफाई की होड़

इस मिशन के अंतर्गत ही देश में स्वच्छता सर्वेक्षण का दौर शुरू हुआ। राज्यों और शहरों में सफाई की होड़ लग गई। एक दूसरे से आगे निकलने की चाहत ने स्वच्छता अभियान को और ताकतवर बनाया। स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर ने नाम कमाया, इंदौर को लगातार इसमें अव्वल आने का गौरव प्राप्त हुआ।

इस अभियान में देश की जानी-मानी हस्तियों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। कचरे का सटीक प्रबंधन से आर्थिक लाभ कमाने की भी योजना इस अभियान के अंतर्गत शुरू की गई, जिसे वेस्ट तो वेल्थ नाम दिया गया। नदियों की सफाई को भी इससे जोड़ा गया। नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा नदी की सफाई भी की जा रही है।

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