गौमाता की सेवा साक्षात ईश्वर सेवा है : बृजमोहन

-बढ़ते-कदम गौशाला के 108 गऊदान कार्यक्रम में शामिल हुए धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल

रायपुर।

गौ माता हमारी जीवनदायिनी माता है। इस माँ का दूध हमे पुष्ट तो करता ही है, उनका गोबर और गौमूत्र खाद बनकर धरती को उपजाऊ बनाता है।जिससे हमें शुद्ध अनाज मिलता। ऐसी मान्यता है कि गौमाता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है।

यही वजह है कि सनातन धर्म मे गौमाता की सेवा को साक्षात ईश्वर सेवा की मान्यता है। उक्ताशय विचार बढ़ते कदम गौशाला,ग्राम मूरेठी मंदिर हसौद में आयोजित 108 गऊदान कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के धर्मस्व-कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने रखी।

नंदी बैल महाराज के पर्व पोला के खास मौके पर आयोजित इस पवित्र कार्यक्रम में बृजमोहन यहां गौमाताओं की पूजा-अर्चना की। उन्हें अपने हाथों गुड़ और रोटी खिलाई। उन्होंने गऊदान करने वाले गौभक्तों को भी सम्मानित किया।

बृजमोहन ने कहा कि गौमाता की सेवा बड़ा काम है। वे 108 लोग सौभाग्यशाली है जिन्होंने बढ़ते कदम गौशाला में गौमाता दान करते हुए उनके जीवन-यापन की व्यवस्था सुदृढ़ करने अपना योगदान सुनिश्चित किया।

उन्होंने कहा कि सरकार तो गौसेवा करने वाले अनेक संस्थाओं को मदद करती है। मंशा रहती है कि गौमाता की अच्छी सेवा हो सके। परंतु दुःखद स्थिति यह भी देखने को मिली कि वे लोग गोबर-गोमूत्र का उपयोग तो बराबर करते है।उसे बेंच लेते है। पर गौमाता को चारा खिलाने में कोताही बरतते है।आखिर ऐसी गौसेवा किस काम की?

अग्रवाल ने बढ़ते कदम संस्था की सराहना करते हुए कहा कि समाज सेवा के क्षेत्र में इस संस्था ने संपूर्ण देश में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। सेवा का कोई भी काम हो सबसे पहले बढ़ते कदम संस्था का नाम लोगों की जुबान पर आता है। मेरा सौभाग्य है कि बढ़ते कदम संस्था के साथ मिलकर सेवा के कार्यों में मैं सहभागी बनता रहा हूं। रायपुर के नजदीक ग्राम दतरेंगा में 10 एकड़ जमीन पर बनने वाली गौशाला का भी जिम्मा सरकार बढ़ते कदम को देने जा रही है।

जल्द ही इस शुभ कार्य का भूमिपूजन होगा

बढ़ते कदम संस्था के अध्यक्ष राजू झमनानी, प्रेमशंकर गौटिया,गौशाला प्रभारी सुनील नरवानी,सिंधी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष अमित जीवन,प्रेम बिरनानी, राजीव मंगतानी,किशोर आहूजा,इंद्रकुमार डोडवाणी,राधाकृष्ण सुंदरानी,गोपालदास चावला, भावना कुकरेजा,अशोक मध्यानी,झामनदास बजाज,प्रह्लाद अग्रवाल आदि उपस्थित थे।

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