नवंबर महीने में होने वाली बचत को जमा कर, युवा कर रहे मरीजों की सेवा

ग्वालियर चंबल के युवाओं ने साल में एक महीने अपने महंगे शौक पर खर्च होने वाले पैसों को गरीबों की सेवा में लगाने का काम शुरू किया है।

ये युवा देश के बड़े शहरों में नौकरियां करते हैं और नवंबर महीने में होने वाली बचत को जमा कर, दिसंबर महीने के दौरान अपने शहर में किसी अच्छे काम में खर्च करते हैं।

अपने इस काम को इन युवाओं ने नो सेव नवंबर नाम दिया है। इसकी प्रेरणा उन्होंने कुछ दूसरे देशों से ली है। जहां लोग नवंबर महीने के अपने शौकिया खर्चों पर लगाम लगाकर इन पैसों से दूसरों का भला करते हैं।

गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में काम करने वाले मुरैना के वरुण और अरुण कहते हैं कि उन्होंने पढ़ा था कि कुछ वेस्टर्न कंट्री हैं जहां लोग नवंबर महीने में सैलून नहीं जाते। घूमने फिरने नहीं जाते, सिनेमा सहित अन्य कोई शौक नहीं करते।

इन सब पर उनका जो मासिक खर्च आता है उस पैसे को बचाते हैं और फिर एक साथ किसी अच्छे काम में लगा देते हैं। चूंकि इस एक महीने में लोग दाढ़ी बनवाने का खर्च भी नहीं करते। इसलिए वहां के लोग नवंबर महीने में बचत करने के इस काम को नो सेव नवंबर कहते हैं।

हर युवा बचाता है 4 से 5 हजार रुपए

युवाओं के इस समूह में मुरैना, ग्वालियर और भिंड के लोग शामिल हैं। वरुण के मुताबिक उनका यह समूह लगातार बढ़ता जा रहा है और वे अपने ज्यादा से ज्यादा साथियों को यह काम करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

उनके समूह का हर सदस्य नवंबर महीने में नो सेव नवंबर के तहत करीब 4 से 5 हजार रुपए बचाते हैं। जिससे वे दिसंबर महीने में गरीबों को गर्म कपड़ बांटने, भोजन कराने और दूसरे जरूरी काम करते हैं।

मुरैना अस्पताल में किया चाय का प्रबंध

युवाओं के इस समूह ने इस साल अपनी बचत को जोड़कर सर्दी के मौसम में जिला अस्पताल में नि:शुल्क चाय के लिए दूध का इंतजाम किया है।

इस दूध से बनी चाय मरीजों में सेवा भारती संस्था के जरिए नि:शुल्क बांटी जा रही है। इस काम के लिए युवा खुद समय निकालकर यहां आए और इस काम की शुरुआत करवाई।

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