SC में दोषी साबित होने तक यौन उत्पीड़न के आरोपित की पहचान छिपी रहने को लेकर याचिका

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में यौन उत्पीड़न के मामलों के लेकर एक और जनहित याचिका दाखिल हुई है। इसमें ऐसे मामले के आरोपित का ट्रायल पूरा होने और दोषी ठहराए जाने तक पहचान उजागर न करने की अपील की गई है। याचिका में जीवन जीने के मौलिक अधिकार में सम्मान से जीने के अधिकार के शामिल होने के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला दिया गया है।

यह याचिका वकील रीपक कंसल ने दाखिल की है। इसमें कहा है कि क्रिमिनल लॉ का सिद्धांत है कि जब तक व्यक्ति अदालत से दोषी नहीं ठहरा दिया जाता उसे निर्दोष माना जाता है। इससे साबित होता है कि सुनवाई पूरी होने तक अभियुक्त की छवि नहीं खराब की जानी चाहिए, क्योंकि ऐसा न होने से दोषी साबित होने तक निर्दोष होने का सिद्धांत बेकार हो जाता है।

याचिका में केंद्र व सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया है। मांग है की सरकारों को निर्देश दिया जाए कि वे ऐसे दिशा-निर्देश और नियम तय करें जिसमें विचाराधीन व्यक्ति की सुनवाई पूरा होने और दोषी ठहराए जाने तक पहचान उजागर न की जाए। साथ ही ट्रायल पूरा होने तक इलेक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया में इस पर बहस और सोशल वेबसाइट पर चर्चा पर भी रोक लगाई जाए। आरोपित व्यक्ति को अभियुक्त कहने के बजाए आरोपित अभियुक्त कहा जाए। यह भी मांग है कि जिन मामलों में अभियुक्त झूठे आरोपों के कारण अदालत से बरी होता है उनमें उस व्यक्ति को मुआवजा दिया जाए।

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