चुनाव प्रचार के लिए शाह अब राजस्थान जाएंगे , टीम भी भेज दी

कर्नाटक चुनाव खत्म होते ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अब राजस्थान की चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं और उसके लिए अपनी टीम भी भेज दी है, साथ ही शाह के लिए किराए का मकान भी तलाशा जा रहा है.

एक महीने से अध्यक्ष के बगैर है पार्टी की राज्य ईकाई

एक ओर केंद्रीय नेतृत्व राज्य में कुछ महीने बाद होने वाले चुनाव को लेकर गंभीर हो गया है तो दूसरी ओर बीजेपी के अंदर घमासान मचा हुआ है. केंद्रीय नेतृत्व और वसुंधरा राजे के बीच मतभेद होने की वजह से राजस्थान में पिछले एक महीने से बीजेपी का कोई प्रदेशाध्यक्ष नहीं है.

राजस्थान में वसुंधरा जैसी मजबूत नेता की अनदेखी बीजेपी को चुनाव में भारी पड़ सकता है. बताया जा रहा है कि बीजेपी के इतिहास में पहली बार एक महीने से ज्यादा वक्त हो गए लेकिन चुनावी साल में भी राजस्थान में बीजेपी किसी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नहीं बना सकी है.

वसुंधरा की पसंद कोई और

14 अप्रैल को राजस्थान के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी को हटा दिया गया था और उसके बाद केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम प्रदेश अध्यक्ष के पद के लिए आया था, लेकिन वसुंधरा राजे के भारी विरोध के बाद गजेंद्र सिंह प्रदेश अध्यक्ष नहीं बन पाए.

वसुंधरा राजे श्रीचंद कृपलानी को राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहती थी, लेकिन इसके लिए केंद्रीय नेतृत्व तैयार नहीं था और गजेंद्र सिंह के प्रस्तावित नाम के खिलाफ राज्य के तमाम मंत्रियों ने सांसदों और विधायकों को लगाकर जमकर लॉबिंग की जिसकी वजह से केंद्रीय नेतृत्व को अपने पसंद का प्रदेश अध्यक्ष बनाने से पीछे हटना पड़ा.

शाह के लिए मकान की तलाश

अब चुनाव नजदीक है और कर्नाटक चुनाव खत्म होने के बाद अमित शाह ने राजस्थान के चुनाव की कमान अपने हाथ में लेने की तैयारी कर ली है. अमित शाह की टीम ने जयपुर में काम करना शुरू भी कर दिया है, साथ ही उनके लिए ही जयपुर में किराए का मकान भी देखा जा रहा है जहां से वह चुनावी कमान संभालेंगे. शाह की टीम ने तीन-चार मकानों को देख रखा है.

उच्च शिक्षा मंत्री किरण महेश्वरी ने कहा कि ये हमारे लिए अच्छी बात है कि अमित शाह हमारे यहां आ रहे हैं. उनकी रणनीति का फायदा हमें मिलेगा. प्रदेश अध्यक्ष के नाम घोषित होते रहेंगे, लेकिन चुनावी तैयारी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में राजस्थान में शुरू हो चुकी है.

हालांकि प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कहा जा रहा है कि एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम तय कर लिया है तो वह पीछे हटने वाले नहीं हैं. ऐसे में देर-सबेर गजेंद्र सिंह ही प्रदेश अध्यक्ष बनेंगे.

इस बीच केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह ने भी राजस्थान का दौरा शुरू कर दिया है. ये बात बीजेपी के भी किसी नेता के गले नहीं उतर रही है कि आखिर वसुंधरा राजे की मर्जी के खिलाफ शाह राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष क्यों बनाना चाहते हैं. बीजेपी जानती है कि वसुंधरा के अलावा राजस्थान बीजेपी में कोई नेता नहीं है जिसके नाम पर वोट हासिल किया जा सके.

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी का कहना है कि कोई विवाद नहीं है जिसको जो जिम्मेदारी मिलेगी उसे करेगा. इधर, कांग्रेस इस बात का भी मुद्दा बना रही है कि जो पार्टी एक महीने से अपना प्रदेश अध्यक्ष नहीं तय कर पा रही हो वो और क्या कर सकेगी. अशोक गहलोत से लेकर सचिन पायलट तक मोदी और वसुंधरा के बीच खटास को सियासी मुद्दा बना रहे है.

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