छत्तीसगढ़

शहीदों की शहादत की जिम्मेदारी भाजपा सरकार की : किरणमयी नायक

शहादत का अपमान कांग्रेस को नहीं स्वीकार - किरणमयी नायक

रायपुर : प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के सदस्य किरणमयी नायक ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के विकास की बड़ी-बड़ी बातें और दावे करने वाले लोग पंद्रह साल में नक्सली मामले का समाधान करने में पूरी तरह नाकामयाब रहे और हर बार घिसे पीटे डायलाॅग से शहीदों की शहादत पर वक्तव्य देने की परंपरा निभाते-निभाते अब भाजपा सरकार की संवेदनशीलता पूरी तरह से शून्य हो चुकी है। सिर्फ संवेदनहीन हो जाते तब भी शहीद परिवार शायद बर्दाश्त कर लेते, पर अब तो अति हो गयी है। शहीदों का अंतिम संस्कार भी नहीं हुआ, अभी अर्थी भी नहीं उठी है और भाजपा के नेता अब ठुमके लगवा रहे है और पूरी बेशर्मी से ऐसे नाच गाने के कार्यक्रमों में ठहाके लगा रहे है।

यह शहीदों की शहादत का अपमान है। दो बोल भी संवेदना के नहीं निकले और औपचारिकता के घड़ियाली आंसू भी नहीं बहाये, वहां तक तो छत्तीसगढ़ की जनता शायद बर्दाश्त भी कर लेती किंतु भाजपा पर सत्ता एवं पद का अहंकार सर चढ़कर बोलने लगा है। एक आम आदमी भी घर परिवार समाज में, अड़ोस-पड़ोस में भी किसी की मृत्यु होने पर ऐसे कार्यक्रम पर तत्काल रोक लगाकर मृतकों के लिये श्रद्धांजलि अर्पित करता है। इतनी भी संवेदनशीलता की अपेक्षा भी अब भाजपा के नेताओं से संभव नहीं है।

नौ-नौ जवानों की शहादत के बाद भाजपाईयों के द्वारा ठुमके लगवाना। निरंतर स्वयं ही स्वयं को देशभक्ति का प्रमाण पत्र देने वालो को तो शायद अब भाजपा के नेताओं के द्वारा देशभक्ति का उत्कृष्टता का प्रमाण पत्र तो इन सभी नेताओं को दे ही देना चाहिये। चूंकि यह नाच गाना मात्र एक अपमान की घटना नहीं है वरन शासन के मंत्रिगणों के द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्रों में जनसंपर्क यात्राओं के दौरान ढोल बाजे नगाड़ों के साथ आतिशबाजी कर प्रचार कर रहे है।

मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, मंत्री अजय चंद्राकर, विधायक श्रीचंद सुंदरानी अपने प्रचार के लिये निकाली जनसंपर्क यात्रा के दौरान लगातार ढोल नगाड़े, पटाखों के साथ ही प्रचार करते रहे और शहीदों की शहादत का निरंतर अपमान करते रहे। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के सदस्य किरणमयी नायक ने कहा है कि क्या यही कारण है कि सुकमा जिले में 11 मार्च को मुख्यमंत्री लोकसुराज अभियान कार्यक्रम के दौरान मोटर सायकल में निकलते है, सुरक्षित वापस लौट आते है उनके वापस लौटने के ठीक तीन दिन बाद एंटीलैंडमाइन व्हिकल में निकले सीआरपीएफ जवानों पर नक्सली हमला करते है जिसमें 9 जवान शहीद हो जाते है।

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