शहीद हेमू कालाणी का नाम हमेशा लोगों के जुबान पर: संजय श्रीवास्तव

भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अमर शहीद स्वतंत्रता सेनानी हेमू कालाणी की 75वीं पुण्यतिथि कार्यक्रम क्रांतिवीर अमर शहीद हेमू कालाणी समिति द्वारा कचहरी चैक किया गया।

रायपुर। भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अमर शहीद स्वतंत्रता सेनानी हेमू कालाणी की 75वीं पुण्यतिथि कार्यक्रम क्रांतिवीर अमर शहीद हेमू कालाणी समिति द्वारा कचहरी चैक किया गया।

अयोजीत कार्यक्रम में रायपुर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संयज श्रीवास्तव ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया।

श्रीवास्तव ने बताया कि भारत को स्वतंत्र कराने में देश के नन्हे क्रांतिकारी हेमू कालाणी का नाम गौरवान्वित एवं अजर अमर रहेगा। गुलामी की जंजीरों में जकड़ी भारत माता को आजाद कराने में खुदीराम बोस और हेमू कालाणी दो नन्हे क्रांतिकारियों को कभी नही भुलाया जा सकता। 1942 में 19 वर्षीय किशोर क्रांतिकारी ने “अंग्रेजो भारत छोड़ो ” नारे के साथ सिंध प्रदेश में हेमू ने सिंधवासी को उत्साह से भर दिया था।

श्रीवास्तव ने आगे बताया कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिन्ध के इतिहास में सिन्ध का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। महात्मा गांधी के आव्हान पर मुंबई मे अखिल भारतीय कांग्रेस के अधिवेशन में अंग्रेजो भारत छोड़ो एवं करो या मरो आंदोलन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।

भारत छोडो आंदोलन के शंखनाद ने स्वतंत्रता आंदोलन के यज्ञ में घी जैसा काम किया। शहीद हेमू कालाणी स्वराज्य सेना का छोटा सा प्रकाश पुंज थे। जो दिलेरी तो था ही साथ ही उसमे देश प्रेम कूट-कूट कर भरा था। वह देश पर प्राणों को न्यौछावर करना अपनी खुशनसीबी समझता था।

उन्होंने आगे बताया कि अंग्रेज अधिकारी कर्नल रिचर्डसन ने इस छोटे से क्रांतिवीर से घबराकर हेमू जी पर सक्खर की मार्शल कोर्ट में देशद्रोह का मुकदमा दायर कर दिया और कोर्ट में उसे आजन्म कैद की सजा सुनाई गई लेकिन उस वीर बालक के चेहरे पर विजय की मुस्कान थी।

वहीं हेमू कालाणी की आजन्म सजा को क्रूर कर्नल रिचर्डसन ने फांसी की सजा में बदलने का हुक्म लिख दिया। आज हेमू कालाणी हमारे बीच में नहीं है लेकिन उस वीर सपूत का नाम देश के सभी लोगों की जुबान पर हमेशा रहेंगा।

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