चक्रव्यूह भेदने वाले, अंगद के पांव उखाड़ने वाले शैलेश को भी मिलेगा इनाम….?

मनमोहन पात्रे :

बिलासपुर :

अति का अंत निश्चित है तो घमण्ड का घर भी चूर चूर होकर रहता है बिलासपुर विधानसभा चुनाव में ऐसा ही कुछ हुआ। जब हाईप्रोफाइल बिलासपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस से शैलष पाडेय को टिकट मिली।

राजनीति के जानकारों का भी यही मानना था कि बीस सालों से भाजपा के विधायक और छत्तीसगढ शासन में मंत्री अमर अग्रवाल को हराना मुश्किल ही नही नामुमकिन भी करार दिया था ।

राजनीति के जानकारों का मानना है की अमर अग्रवाल चुनावी मैनेंजमेंट के गुरु हैं तो वहीं उन्हें बीस सालों से राजनीति का अनुभव है।लेकिन इस समय उनके सिपहसलार भी गच्चा खा गए और नए नवेले राजनीति में आये शैलेश के सौम्य रुख और सॉफ्ट पॉलिटिक्स ने अमर की लुटिया डुबो दी ।

वैसे भी शैलेष पाडेय अपने शालीनता और शिष्टता भरे अंदाज के लिये हमेशा से सराहे जाते रहे हैं। वे इस राजनीति में भी इसी अंदाज में सामनें आये। तब भी उनका विरोध पार्टी के अंदर और बाहर हुआ था,जानकर मानते हैं, जायज था विरोध, क्योंकि पार्टी में सैकडों नेता और कार्यकर्ताओं नें अपना जीवन गुजार दिया था।

पार्टी के लिये। नेताओं में अंदर ही अंदर विरोध फुट रहे थे। तब भी शैलेष नें मर्यादा नहीं तोडी, जब पार्टी नें उन्हें बिलासपुर विधानसभा से टिकट दे दी। लेकिन उसके बाद कांग्रेस पार्टी कार्यालय में जो कुछ हुआ उसे पुरा प्रदेश और देश नें देखा। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं नें मर्यादा लांघ दी।

पार्टी के वरिष्ठ नेता नें उन्हे सरेआम जलील किया, शैलेष शांत थे उन्हे बडी लडाई जो लडनी थी। विरोधियों नें उन्हे सोशल मिडिया में पैरासूट की उपाधी से नवाजा तरह तरह के हथकंडे अपनाये। शेलेष ने ना अपना आपा खोया ना विरोध किया बडी शालीनता के साथ एक शिक्षाविद और राजनितक होने का परिचय दिया।

चुनाव प्रचार के दौरान वे सहयोगियों के साथ पुरे दम खम के साथ चुनावी मैदान में उतर गये। अंदर और बाहर विरोधियों के पूरजोर विरोध के बाद भी वे एक कददावर नेता और मंत्री के खिलाफ मैदान में उतर गये।

जैसे उन्हे पहले से मालूम था कि उनकी इस राजनीतिक लडाई में पूरी कायनात उनके साथ हो। शायद इसलिये ही वे भारतीय जनता पार्टी के कददावर नेता,बीस साल के अनुभवी विधायक,पन्द्रह सालों के मंत्री जैसे महारथी, को पराजित कर वेंटीलिटर में चली गई कांग्रेस में वापस प्राण फुंका।

बिलासपुर में कांग्रेस को एक मुकाम तक पहुचाया। वो भी सिर्फ अपने और जनता के दम पर जबकी न अटल के लोग शैलेश का साथ दिए न ही पुराने धुरन्धर कांग्रेसी कहे जाने वाले लोग।

शेख गफ्फार छोटे पार्षद जैसे और भी समर्पित लोगो ने शैलेश का साथ जरूर दिया गौरतलब है कि कांग्रेस के पिछले चार पंचवर्षीय विधानसभा चुनाव के मुकाबले में अब तक का इकलौता मौका रहा जब शैलेष नें बिलासपुर से कांग्रेस की टिकट पर लगातार चार बार के विजेता चुनावी मेनेंजमेंट के गुरु को पराजित किया।

इस विधानसभा चुनाव में राजनितिज्ञों सहित जनता नें भी माना की टक्कर कांटे की है।हालांकि सबक यह है कि कांग्रेस और भाजपा के मंत्री को कि कभी भी किसी को कमतर नहीं आंका जाना चाहिये।

छत्तीसगढ में कांग्रेस की सरकार बन रही है और मुख्यमंत्री की घोषणा होनें जा रही है उसके बाद मंत्री मंडल का गठन होना है ऐसे में क्या कांग्रेस के वरिष्ठ नेंता बिलासपुर सीट से विजय होनें वाले विधायक शैलेष पाडेय को मंत्री मंडल में स्थान देंगे…..

ताकि कठिन परिस्थितियों में धैर्य के साथ राजनीति के महारथी को पराजित कर कांग्रेस को मान और सम्मान दिलाने वाले शैलेष नें प्रदेश और देश में बिलासपुर का एक सम्मानजनक स्थान बनाया।

ऐसे विजेता को मंत्रीमंडल में शामिल किया जाना उनके लिये पुरस्कार होगा तो अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिये पार्टी के प्रति आस्था और विश्वास की डोर मजबूत होगी।

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