ज्योतिष

शारदीय नवरात्र : विधिवत पूजन से मनाए मां को घर आएगी खुशहाली

आज देवी शैलपुत्री व देवी ब्रह्मचारिणी दोनों का पूजन किया जाएगा

आज बुधवार को आश्विन शुक्ल प्रतिपदा पर शारदीय नवरात्र की घट स्थापना के साथ ही द्वितीया का पूजन भी किया जाएगा।

अतः आज देवी शैलपुत्री व देवी ब्रह्मचारिणी दोनों का पूजन किया जाएगा। शैलपुत्री चंद्र पर स्वामित्व रखकर व्यक्ति के मन, सुख-सुविधा, माता, जायदाद, संपत्ति, निवास व वाहन पर सत्ता रखती हैं।

देवी शैलपुत्री की पूजा सफ़ेद फूल, चंदन से कर मावे का भोग लगाया जाता है। ब्रह्मचारिणी मंगल पर स्वामित्व रखकर व्यक्ति की बुद्धि, मानसिकता, सेहत व आयु पर सत्ता रखती हैं।

ब्रह्मचारिणी की पूजा लाल फूल, सिंदूर, गुड़ से की जाती है। शैलपुत्री की साधना से अपना घर बनाने का सपना पूरा होता है और ब्रह्मचारिणी की साधना से स्टूडेंट्स को एंट्रेंस एग्जाम में सक्सेस मिलती है।

स्पेशल पूजन विधि: घर की उत्तर-पूर्व दिशा में लाल कपड़ा बिछाएं। चौकी पर कांसे के लोटे में जल, सिक्के, सुपारी आदि डालकर आम के पत्ते सजाकर नारियल रखकर कलश स्थापित करें।

मिट्टी की हांडी में साफ मिट्टी में जौ बोकर उस पर मिट्टी का मटका रख कर नवरात्र स्थापना करें। साथ ही नव देवीयों का चित्र रखें और गौघृत का अखंड दीपक जलाकर नवरात्र की स्थापना करें। देवी शैलपुत्री व ब्रह्मचारिणी का विधिवत पूजन करें।

घी में चमेली का इत्र मिलाकर दीप करें, मोगरे-चमेली की अगरबत्ती करें। शैलपुत्री पर चंदन, सफ़ेद फूल व मावा चढ़ाएं और ब्रह्मचारिणी पर सिंदूर, लाल फूल व गुड़ चढ़ाएं। एक-एक माला तीन विशेष मंत्रों की जपें। पूजा के बाद भोग गाय को खिलाएं।

स्थापना मुहूर्त: प्रातः 06:18 से प्रातः 06:55 तक।

प्रातः पूजन मुहूर्त: सुबह 07:00 से प्रातः 09:00 तक।

संध्या पूजन मुहूर्त: रात 19:47 से रात 21:43 तक।

स्थापना पूजन मंत्र: ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥

शैलपुत्री पूजन मंत्र: ॐ शैलपुत्री देव्यै: नमः॥

ब्रह्मचारिणी पूजन मंत्र: ॐ ब्रह्मचारिण्यै देव्यै: नमः॥

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शारदीय नवरात्र : विधिवत पूजन से मनाए मां को घर आएगी खुशहाली
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