इन नौ दिनों में इस तरह पाएं अपने दुखों से छुटकारा

देवी के भक्तों के लिए नवरात्रि का समय बहुत खास और पवित्र होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष में दो बार नवरात्रि का यह पावन समय आता है, मार्च-अप्रैल में आने वाले नवरात्रि को सामान्य भाषा में चैत्र नवरात्रि कहा जाता है और जो नवरात्रि अक्टूबर-नवंबर में आते हैं उन्हें शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है।

नवरात्रि

नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की अराधना और शक्ति पूजा की जाती है। हर दिन एक खास देवी को समर्पित होता है, यही नवरात्रि की सबसे बड़ी खासियत या महत्ता होती है।

बेहतरीन संयोग

यूं तो वर्ष में दो बार आने वाले नवरात्रि हर साल बहुत खास होते हैं, लेकिन इस बार 21 सितंबर से प्रारंभ होने जा रहे नवरात्रि हस्त नक्षत्र में शुरू होंगे जो अपने आप में बहुत बेहतरीन संयोग है।

हस्त नक्षत्र

जानकारों के अनुसार हस्त नक्षत्र में प्रारंभ होने जा रहे नवरात्रि में घट स्थापना विशेष महत्व रखती है। सुबह से दोपहर तक अभिजित मुहूर्त में अगर आप पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हैं, घट की स्थापना करते हैं तो परिवार में सुख-समृद्धि तो मिलेगी साथ-साथ परेशानियों और बीमारियों से भी मुक्ति मिलेगी।

नौ दिन का त्यौहार

इस बार कोई भी दो तिथियां एक दिन नहीं आ रही हैं, इसका अर्थ यह है कि नवरात्रि का ये त्यौहार पूरे नौ दिन चलेगा और दसवें दिन विजयदशमी मनाई जाएगी। अपने आप में यह एक शुभ संयोग है।

संयोग

विशेषज्ञों के अनुसार 21 सितंबर को प्रतिपदा तिथि सूर्योदय से ही आरंभ हो जाएगी और सूर्योदय के साथ-साथ कलश स्थापना का शुभ मुहूत्त भी होगा। अगर आपको अपने घर में कलश स्थापना करनी है तो आपको 11:36 से 12:24 के बीच कर लेनी चाहिए। इस दिन हस्त नक्षत्र रहेगा और सूर्य-चंद्रमा कन्या राशि में विराजित रहेंगे।

नौ दिन

नवरात्रि के दिनों में देवी के नौ स्वरूपों को भोग लगाने का अलग-अलग महत्व है। जो जातक अपने जीवन में चल रही परेशानियों से मुक्ति पाना चाहते हैं, उन्हें इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

प्रथम नवरात्रि

प्रथम नवरात्रि पर मां को गाय का शुद्ध दूध अर्पित करने से पुराने रोग से मुक्ति मिलती है। वहीं दूसरे नवरात्रि पर शक्कर का भोग लगाने से आयु वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

दुखों से मुक्ति

तृतीय नवरात्रि पर गाय के दूध से बनी खीर, मिठाई से माता को भोग लगाएं, इससे आपको जीवन के दुखों से मुक्ति मिलेगी।

निर्णय क्षमता

चौथे नवरात्रि के दिन देवी को माल पुएं का भोग लगाएं, इससे आपको बुद्धि, शक्ति और सामर्थ्य की प्राप्ति होगी। इससे आपकी निर्णय क्षमता भी विकसित होती है।

शारीरिक स्वास्थ्य

पांचवें नवरात्रि पर देवी को केले का भोग लगाने से इससे शारीरिक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। अगर दूसरों को अपने प्रति आकर्षित करना चाहते हैं तो छठे नवरात्रि पर शक्ति स्वरूपा को शहद अर्पित करें।

आकस्मिक संकटों से मुक्ति

सातवें दिन माता को गुड़ का भोग लगाने से आकस्मिक संकटों से मुक्ति मिलती है, वहीं अष्टमी के दिन नारियल का प्रसाद चढ़ाने से संतान संबंधी कष्टों की समाप्ति होती है।

मृत्यु के दर से मुक्ति

नवमी के दिन शक्ति की देवी को अगर आप तिल का भोग लगाते हैं तो आपको मृत्यु के बह्य से राहत मिलेगी, आपके दिल के तमाम डर दूर हो जाएंगे।

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