आरोपियों को ‘हिन्दू आतंकवादी’ कहने पर शिवसेना ने जताई आपत्ति

मुंबई : शिवसेना ने गुरुवार को कहा कि तर्कवादी गोविन्द पानसरे और नरेन्द्र दाभोलकर के हत्यारों को दण्डित किया जाना चाहिए किन्तु अपने ही देश में विभिन्न मामलों की संख्या बढऩे मात्र से ही हिन्दुओं को आतंकवादी नहीं कहा जा सकता। पार्टी के मुखपत्र सामना के सम्पादकीय में शिवसेना ने कहा कि पानसरे, दाभोलकर, पत्रकार गौरी लंकेश और तर्कवादी एम एम कलबुर्गी की हत्या की साजिश अलग अलग हो सकती है तथा इसका मुख्य षडयंत्रकर्ता एक व्यक्ति न हों।

माओवादियों से संदिग्ध संबंध होने के कारण पांच कार्यकर्ताओं के खिलाफ हाल की पुलिस कार्रवाई के बारे में पार्टी ने कहा, गिरफ्तार किए गए नक्सल समर्थकों को कथित समर्थक कहा जा रहा है जबकि हिन्दुत्ववादियों को सीधे तौर पर हिन्दूवादी उग्रवादी कहा जा रहा है। शिवसेना ने कहा कि यह हैरत की बात है कि हिन्दुओं को उनके ही देश में आतंकवादी करार दिया जा रहा है विशेषकर मोदी-फडणवीस के शासन में। शिवसेना केन्द्र एवं महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने के बावजूद अपने गठबंधन भागीदार को लेकर प्राय: आलोचक की भूमिका में रहती है।

हालांकि पार्टी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की इस बात को लेकर सराहना की कि उन्होंने पुलिस को सही निर्देश दिया है और उससे कहा है कि वह कार्रवाई करते समय दायें या बायें न देखे। शिवसेना ने कहा कि यह भी तय नहीं हुआ है कि पानसरे, दाभोलकर, लंकेश और कलबुर्गी की हत्या के पीछे एक ही मुख्य षडयंत्रकर्ता था। पार्टी ने कहा, सभी वैयक्तिक चिंतक थे और या तो कम्युनिस्ट अथवा समाजवादी विचारधारा से जुड़े हुए थे। उनकी हत्या अलग साजिश हो सकती है।

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