भागवत की वकालत के बाद शिवसेना ने भाजपा पर साधा निशाना

भाजपा राम मंदिर के मुद्दों पर टिप्पणी करने से ‘‘बचते’’ हैं।

मुंबई:

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने बैठक बुलाया था जिसमे तमाम राजनीतिक पार्टी के दिग्गजों को निमंत्रण दिया था। संघ प्रमुख मोहन भागवत की वकालत के दो दिन बाद शिवसेना ने उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की लेकिन इसे मुद्दे को लेकर ‘‘नेताओं’’ पर सवाल उठाए।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी के अगले 50 सालों तक देश पर शासन करने के बारे में पूरे विश्वास से बोलते हैं, लेकिन जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली संविधान की धारा 370 को खत्म करने और राम मंदिर के मुद्दों पर टिप्पणी करने से ‘‘बचते’’ हैं।

जल्द से जल्द होना चाहिए राम मंदिर का निर्माण

भाजपा के प्रति आलोचनात्मक रूख रखने वाली शिवसेना ने अपनी पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में नरेंद्र मोदी सरकार से कहा कि वह भागवत के बयान के बाद अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के मुद्दे को ‘‘गंभीरता’’ से ले।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने हालांकि राय व्यक्त की कि मंदिर मुद्दे को सिर्फ चुनावी वादे तक सीमित कर दिया गया है और इसलिए यह हिंदुत्व का माखौल उड़ाने वाला मुद्दा बन गया है।

नयी दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम में बुधवार को भागवत ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के जल्द निर्माण की बात उठाई थी। उन्होंने कहा था, ‘‘राम मंदिर का निर्माण जल्द से जल्द होना चाहिए।’’

प्रतिबद्धता से जुड़ा है संघ प्रमुख द्वारा राम मंदिर पर अपनाया गया रूख

शिवसेना ने पूछा, ‘‘संघ प्रमुख द्वारा (राम) मंदिर पर अपनाया गया रूख प्रतिबद्धता से जुड़ा है। लेकिन क्या उस प्रतिबद्धता का एक अंश भी राजनेताओं के अंतर्मन में बचा है?’’ मराठी दैनिक ने कहा, ‘‘शाह देश में 50 सालों तक भाजपा के शासन करने के बारे में विश्वास से बोलते हैं।

लेकिन धारा 370 को खत्म करने या राम मंदिर के निर्माण की समयसीमा तय करने की प्रतिबद्धता जाहिर करने से बचते हैं।’’ इसमें कहा गया, ‘‘क्या पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें और सैनिकों के कलम होते सिर भारत का भविष्य हैं?’’

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