छत्तीसगढ़ में शराबी परेशान, 702 दुकानों में से 352 में लटके ताले, ये है कारण

बिलासपुर।

आबकारी विभाग का सर्वर पिछले तीन दिनों से डाउन है। इससे विभाग ब्रेवरेज को ई-पेमेंट नहीं कर पा रहा है। साथ ही शराब की स्केनिंग भी ठप हो गई है। इससे शराब गोदाम से दुकानों तक नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में एक-एककर शराब दुकानों में ताला लटकना शुरू हो गया है। अब तक प्रदेश की 702 शराब दुकानों में से 352 बंद हो चुकी हैं। इनमें से ज्यादातर देसी शराब दुकानें हैं। जहां शराब बिक भी रही है, वहां ऑफलाइन स्केनिंग करके काम चलाया जा रहा है।

प्रदेश में शराब की खरीद-बिक्री पूरी तरह से ऑनलाइन है। सिस्टम केवल ग्राहकों को स्केन करके शराब देने तक सीमित नहीं है। विभाग शराब का ऑर्डर भी ऑनलाइन देता है और उसका भुगतान भी ई-पेमेंट के जरिए होता है। इसके लिए आबकारी विभाग का अपना सर्वर है, जो तीन दिनों से ठप है।

इसका असर यह हुआ कि आबकारी विभाग ना तो ऑनलाइन ई-पेमेंट कर पा रहा है और ना ही शराब की बोतलों का स्केन हो रहा है। ऑफलाइन कुछ हद तक शराब बेची गई। इसके बाद आबकारी विभाग ने शराब दुकानों को बंद करना शुरू कर दिया है।

देसी दुकानों में केवल एक ही किस्म और एक ही कीमत वाली शराब होती है। इसके कारण उनके ग्राहकों ने सभी उपलब्ध दुकानों से कम या ज्यादा मात्रा में शराब खरीद ली। इससे वहां सबसे पहले ताला लटकना शुरू हुआ। अंग्रेजी शराब दुकानों में भी पूरे जिले में सस्ती किस्म की शराब खत्म हो चुकी है। वहां केवल महंगी शराब बची है। इसके चुनिंदा ग्राहक होते हैं।

ऐसे में अंग्रेजी दुकान खुली हो हैं लेकिन वहां भी मनचाहे ब्रांड की शराब नहीं मिल रही है। अचानक से शराब नहीं मिलने के कारण शौकीनों में पिछले दो दिनों से शराबबंदी लागू होने की चर्चा है। जबकि समस्या सर्वर के कारण पैदा हो रही है।

सौ करोड़ से अधिक के नुकसान का अनुमान

सर्वर में खराबी के कारण एकाएक शराब दुकानें बंद होने से शासन स्तर पर भी हड़कंप मच गया है। इस अव्यवस्था के कारण प्रदेश को 100 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। हालांकि अधिकारी फिलहाल नुकसान का आकलन करने से बच रहे हैं। इतने बड़े नुकसान के लिए प्रदेश में बैठे आला अधिकारियों के मैनेजमेंट को जिम्मेदार बताया जा रहा है।

ऑफलाइन 1800 बॉटल की स्केनिंग

आबकारी विभाग का सर्वर ठप होने के कारण जिले के आबकारी अधिकारियों ने अपने सेल्समैन को ऑफलाइन खरीदी करने के निर्देश दिए हैं। एक स्केनिंग मशीन से 1800 बॉटल को ही ऑफलाइन स्केन किया जा सकता है। इसके बाद मशीन का डाटा फुल हो जाता है। इस डाटा को सर्वर में अपलोड करने के बाद भी मशीन नई बॉटल को स्केन करेगी। मौजूदा स्थिति में स्केनिंग मशीन अपनी पूरी क्षमता के अनुसार स्केन कर चुकी है। अब शराब होने के बाद भी दुकानें बंद करनी पड़ रही है।

ऐसा है खरीदी सिस्टम

डिस्टलरी में शराब बनने के बाद जैसे ही बॉटलिंग होती है, उसे ऑनलाइन आबकारी विभाग के सर्वर में अपलोड किया जाता है। शराब ब्रेवरेज के गोदामों में पहुंचती है तो उसकी फिर से सर्वर में जाकर ऑनलाइन एंट्री की जाती है। आबकारी विभाग दुकानों में जरूरत के हिसाब से ब्रेवरेज का ऑनलाइन शराब का आर्डर करता है। ई.पेमेंट करने के बाद शासन से शराब लेने की अनुमति मिलती है।

तब कहीं जाकर आबकारी विभाग शराब लेने के लिए परमिट काट पाता है। इसके बाद भी ऑनलाइन सिस्टम से छुटकारा नहीं मिलता। शराब दुकानों में पहुंचने के बाद उसकी दुकान के हिसाब से ऑनलाइन एंट्री होती है।
फिर स्केनिंग मशीन से स्केन करके ग्राहकों को दिया जाता है। सिस्टम इतना प्रभावी है कि आबकारी विभाग अपनी किसी भी बॉटल को स्केन करके पता लगा सकता है कि इसे किस समय, कौन से ग्राहक को बेचा गया था। यहां तक ग्राहक की फोटो भी दुकानों में लगे कैमरों में सुरक्षित रहती है।

जिले की 23 शराब दुकानें बंद

देसी मदिरा दुकान मोपका, जोंधरा, यदुनंदन नगर, तिफरा, तखतपुर, बिल्हा, दगोरी, सेंदरी, पौंसरा, तिफरा, यदुनंदननगर, तखतपुर, सकरी, गनियारी, सरकंडा, चांटीडीह, चांटीडीह सब्जीमंडी, सीपत, बंधवापारा, लिंगियाडीह, मंगला, वसुंधरा नगर, पुराना बस स्टैंड बंद हो चुकी है।

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