शूटर चंद्रो तोमर का कोरोना से निधन, इन पर ही बनी थी सांड की आंख फिल्म

कुछ दिन पहले सांस लेने में तकलीफ के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

उत्तर प्रदेश के बागपत की शूटर दादी चंद्रो तोमर का कोरोना से निधन हो गया है। 89 वर्षीय चंद्रो तोमर पिछले कई दिनों से मेरठ के आनंद अस्पताल में में भर्ती थीं। नेशनल और राज्य लेवल पर शूटर दादी ने निशानेबाजी में कई पदक जीते थे। शूटर दादी बागपत के जोहड़ी गांव की रहने वाली थीं। कुछ दिन पहले सांस लेने में तकलीफ के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

मूलरूप से शामली के गांव मखमूलपुर में शूटर दादी का जन्म एक जनवरी 1932 को हुआ। सोलह साल की उम्र में जौहड़ी के किसान भंवर सिंह से उनकी शादी हो गई। भरे-पूरे परिवार में निशानेबाजी सीखने की दिलचस्प कहानी है।

बता दें कि साल 1998 में जौहड़ी में शूटिंग रेंज की शुरुआत डॉ. राजपाल सिंह ने की। लाडली पौत्री शेफाली तोमर को निशानेबाजी सिखाने के लिए वह रोज घर से शूटिंग रेंज तक जाती थी। शेफाली शूटिंग सीखती और चंद्रो तोमर देखती रहती थी। एक दिन चंद्रो तोमर ने एयर पिस्टल शेफाली से लेकर खुद निशाना लगाया। पहला निशाना दस पर लगा। दादी की निशानेबाजी देख रहे बच्चों ने तालियां बजाई। यहीं से चंद्रो तोमर की निशानेबाजी का सफर शुरू हुआ।

सांड की आंख फिल्म बनी थी।

चंद्रो तोमर और उनकी देवरानी प्रकाशी तोमर के जीवन पर तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर ने सांड की आंख फिल्म भी बनाई थी।

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