न्यायालयों में जजों की कमी, सरकार ने लिखित जवाब में दिया आकड़ा

देश के अलग-अलग कोर्टों में सालों से लंबित पड़ा मामला

नई दिल्ली:देश के सभी 25 हाईकोर्टों में कुल मिलाकर 57 लाख से भी ज़्यादा मामले लंबित पड़े हैं जिनमें से 40 फ़ीसदी मामले 5 साल से 20 साल तक पुराने हैं. कुल लंबित मामलों में से 54 फ़ीसदी मामले केवल पांच उच्च न्यायालयों में लंबित हैं. इनमें इलाहाबाद, पंजाब और हरियाणा, मद्रास, बॉम्बे और राजस्थान हाईकोर्ट शामिल हैं. इनका एकमात्र कारण है न्यायालयों में जजों की कमी है.

देश के सभी हाईकोर्टों को मिलाकर जजों की कुल स्वीकृत संख्या 1098 है, इनमें सबसे ज़्यादा स्वीकृत पद इलाहाबाद हाई कोर्ट में है जहां ये संख्या 160 है, जबकि सबसे कम सिक्किम हाई कोर्ट में है जहां इसकी संख्या महज 3 है. गौरतलब है कि इन स्वीकृत 1098 पदों में से देश के हाईकोर्टों में जजों के 454 पद खाली पड़े हैं.

स्वीकृत पदों की तरह खाली पड़े पदों की संख्या भी सबसे ज़्यादा इलाहाबाद हाई कोर्ट में ही है यहां जजों के कुल 66 पद खाली पड़े हैं. इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट का नम्बर आता है जहां जजों के स्वीकृत 72 पदों में से 41 पद खाली पड़े हैं. फ़िलहाल देश के सभी हाईकोर्टों को मिलाकर जजों के 644 पद भरे हुए हैं जिनमें 567 पुरुष जबकि 77 महिला जज हैं.

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