छत्तीसगढ़राज्य

नर्क से कम नहीं थी शकुन गौशाला : गवाहों के बयान से दहल जाएंगे आप…जाने क्या किसने क्या कहा

न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष एके सामंत रे दर्ज किया गवाहों के बयान

रायपुर। दुर्ग और बेमेतरा जिले के गौशालाओं में हुए गायों की मौत के मामले में न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष एके सामंत रे शनिवार को गवाहों से करीब घंटे भर पूछताछ की। जिसमें दुर्ग और बेमेतरा जिले के गौशालाओं में घटना से पहले और घटना के समय बीमार गायोंं की शिफ्टिंग में पशु चिकित्सकों का सहयोग करने वाले गवाहों के बयान हुए। गवाहों ने आयोग को बताया कि गौशालाओं में घटना से पहले गायों के प्रति इतनी क्रुरता हमने कहीं नहीं देखी। चारा पानी के अभाव में गाभिन गायें कमजोर हो गई थीं। वह बछड़े को जन्म नहीं दे सकी। गवाहों ने बताया कि फूलचंद गौशाला गोड़मर्रा में चिकित्सकों के इलाज के बाद ही गाय बछड़े को जन्म दे पाई। कमजोर गाय बड़ी तकलीफ के बाद 20 अगस्त को बछड़े को जन्म दिया था।

एक दिन में चार गवाहों का बयान

न्यायिक जांच आयोग ने राजपुर, गोड़मर्रा, रानो सहित अन्य गावों में रहने वाले गवाहों को समन भेजकर सुनवाई में उपस्थित होने कहा है। एक दिन में चार गवाहों को बयान के लिए बुलाया जा रहा है। आयोग गवाहों से लिखित में दी गई जानकारी के अनुसार पूछताछ करेगा। इससे पहले गायों के शवों का पोस्ट मार्टम करने वाले डॉ. संदीप इंदुरक, डॉ. अल्पना चंद्राकर और डॉ. अर्जना मिश्रा का भी बयान हो चुका है। इसके अलावा दुर्ग और बेमेतरा जिले के पशुधन विकास विभाग के उप संचालक, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष, सचिव एवं अन्य अधिकारियों का भी बयान हो चुका है।

फरार हैं आरोपी, अब तक नहीं हुई गिरफ्तारी

फूलचंद और मयूरी गौशाला के आरोपियों को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है। फूलचंद गौशाला के संरक्षक सरस्वती वर्मा, लक्ष्मी वर्मा, राजेन्द्र वर्मा, मयूरी गौशाला के अध्यक्ष एम नारायण फरार हैं। दोनों गौशाला के अध्यक्ष व आरोपियों पर बेमेतरा पुलिस ने 5-5 हजार रुपए का इनाम भी रखा है।

गवाहों ने बताया क्या थे हालात

अध्यक्ष ने पूछा गौशाला के अंदर और बाहर क्या देखा
अध्यक्ष के सवालों के जवाब में बेमेतरा जिले के गवाहों ने बताया कि 15 अगस्त को जब वे राजपुर के शगुन गौशाला पहुंचे। तब वहां गौशाला के संचालक हरीश वर्मा और ग्रामीण थे। गौशाला में चारा और पानी की व्यवस्था नहीं थी। गायें भूख प्यास से तड़प रही थीं। मृत गायों का शव पड़ा हुआ था। 2-2 फीट के गड्ढे में 4-5 शवों को डाला गया था, लेकिन मिट्टी नहीं डाली थी।
जब गौशाला के बाहर का जायजा लिया तो वहां भी शवों को कंटीली झाड़ियों के पीछे फेंक दिया था। जिसे कुत्ते नोच रहे थे। इसे देखने के बाद हमने साथ में घूम रहे गौशाला संचालक वर्मा से सवाल किया कि आखिर उन्होंने ऐसा काम क्यों किया? तब उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि आप जहां चाहे वहां शिकायत कर लो। कोई भी उसका बाल बांका नहीं कर सकता।

Summary
Review Date
Reviewed Item
नर्क से कम नहीं थी शकुन गौशाला : गवाहों के बयान से दहल जाएंगे आप...जाने क्या किसने क्या कहा
Author Rating
51star1star1star1star1star
Tags
advt

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.