छत्तीसगढ़

सिकलसेल जांच-गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाने की तैयारी

संचालक स्वास्थ्य सेवाएं ने छत्तीसगढ़ मंे सिकलसेल जांच के लिए ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकाडर्’ बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की।

रायपुर: राज्य सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ में सिकलसेल जांच के लिए 21 मार्च को वृहद जांच अभियान चलाकर ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ बनाने की तैयारी की जा रही है। इस दिन पांच लाख गर्भवती महिलाओं, बच्चों सहित अन्य की सिकल सेल जांच करने का लक्ष्य रखा गया है। संचालक स्वास्थ्य सेवाएं ने छत्तीसगढ़ मंे सिकलसेल जांच के लिए ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकाडर्’ बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की। बैठक मेडिकल कालेज परिसर स्थित रेड क्रास सोसायटी सभाकक्ष में आयोजित की गई थी। संचालक रानू साहू ने कहा कि प्रदेश में सिकलसेल एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या है।

सिकल सेल पर जागरुकता जन सामान्य में बढ़ाने के लिए यह रिकार्ड बनाने की तैयारी की जा रही है। छत्तीसगढ़ में लगभग 10 फीसदी आबादी सिकल सेल के गुण पाये जा सकते हैं। उन्हांेने बताया कि उप स्वास्थ्य केन्द्रों में गर्भवती महिलाओं व उनके पति की साल्यूबिलिटी जांच की जाएगी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चिरायु दल द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रो और शासकीय स्कूलों में छात्र-छात्राओं की सिकल सेल जांच की जाएगी।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियो ने बताया कि गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड सुबह 10 बजे से सायं 04 बजे तक बनाया जाएगा। वर्ल्ड रिकार्ड की प्रतिनिधि उस दिन उपस्थित होकर किसी भी उप स्वास्थ्य केन्द्र अथवा शासकीय स्कूल या आंगनबाड़ी केन्द्रों में रिकार्ड की पुष्टि करेंगे। इसके लिए जिला सिकलसेल कार्यक्रम अधिकारी तथा चिरायु दल की बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा व प्लानिंग की गई। पंजीकृत गर्भवती महिलाओं की संख्या के अनुसार साल्यूबिलिटी जांच कीट उप स्वास्थ्य केन्द्रों में भेजने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चिरायु दल को भी यह कीट छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पाेरेशन से समय पर प्राप्त करने को कहा गया है।

अधिकारियों ने बताया कि 05 हजार या अधिक जनसंख्या में स्थापित उप स्वास्थ्य केन्द्र में एक दिन में 120 सिकल सेल जांच करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं 03 हजार जनसंख्या में स्थापित उप स्वास्थ्य केन्द्रों को 80 सिकल सेल जांच तथा चिरायु दल द्वारा 500 सिकल सेल जांच करने का लक्ष्य दिया गया है। उपस्वास्थ्य केन्द्र में ए.एन.एम., पैरामेडिकल स्टॉफ, बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ लैब टेक्नीशियन आदि की ड्यूटी लगाए जाएंगे। सिकल सेल जांच हेतुु रजिस्ट्रेशन सवेरे 08.30 बजे से प्रारंभ होगा। गर्भवती माताओं की सिकल सेल जांच पहले की जाएगी। यदि गर्भवती माता सिकल सेल धनात्मक पाई जाती है तब उनके पति की भी साल्यूबिलिटी टेस्ट की जाएगी। धनात्मक पाए गए प्रकरण के रक्त सेंपल उसी दिन ए.एन.एम. या सिकल सेल जांच दल द्वारा इलेक्ट्रोफोरिसिस जांच के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र या जिला अस्पताल में भेजा जावेगा। जटिल प्रकरणों को मेडिकल कालेज अथवा सिकल सेल संस्थान में रिफर किया जायेगा। सभी जिलों को पंजीयन हेतु कोड दिये जा चुके हैं।

शाम 04 बजे अभियान संपन्न होने के पश्चात सिकल सेल नोडल अधिकारी को अंतिम रिपोर्ट हस्ताक्षर व सील सहित भेजने के निर्देश हैं। इसके लिए सभी जिलों में प्रशिक्षण भी प्रारंभ किया जायेगा।21 मार्च 2018 सिकलसेल के गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाने के पूर्व 15 मार्च 2018 को सभी स्थानों में 10-10 सिकलसेल जांच कर डेमो किये जायेंगे। ताकि इसकी तैयारियों की जानकारी मिल सकेगी व उसका निराकरण किया जा सकेगा। बैठक में राज्य उपसंचालक ब्लड बैंक व राज्य नोडल अधिकारी सिकलसेल डॉ. एस.के. बिंझवार, उपसंचालक डॉ. जे.पी. मेश्राम, मेडिकल कालेज के डॉ. अरविंद नेरल, डॉ. कौशल प्रसाद सहित जिले के अधिकारी उपस्थित थे। अधिकारियों ने बताया कि चिरायु दल द्वारा इस वर्ष 07 लाख 15 हजार 211 बच्चो की आंगनबाड़ी व शासकीय स्कूलों में जांच की गई।

जिसमें 25 हजार 181 में सिकल सेल के गुण पाये गये। इनमें से 6 हजार 696 बच्चो को उच्च चिकित्सा संस्थान में उपचार हेतु रिफर किया गया।

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