छत्तीसगढ़

समावेशी शिक्षा योजना अंतर्गत सांकेतिक भाषा का हुआ प्रशिक्षण

मनीष शर्मा:

मुंगेली: राजीव गांधी शिक्षा मिशन (सर्व शिक्षा अभियान) विकासखण्ड स्रोत कार्यालय मुंगेली द्वारा 4 दिवसीय सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें शासकीय प्राथमिक शाला के 18 शिक्षक एवं उच्च प्राथमिक शाला के 18 कुल 36 शिक्षको को प्रदान किया गया।

दीप प्रज्वलित कर सरस्वती वन्दना के साथ प्रशिक्षण का शुभारम्भ

जिला परियोजना कार्यालय राजीव गांधी शिक्षा मिशन के डीएमसी व्ही.पी. सिंह, सहायक कार्यक्रम समन्वयक माया सिंह एवं विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी डॉ. प्रतिभा मण्डलोई व खण्ड स्रोत समन्वयक डी.सी. डाहिरे के द्वारा मॉ सरस्वती की प्रतिमा में दीप प्रज्वलित कर सरस्वती वन्दना के साथ प्रशिक्षण का शुभारम्भ किया गया।

विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी डॉ. प्रतिभा मण्डलोई ने बताया

सिंह ने बताया कि ये बच्चें दिव्यांग बच्चें है जो कि दिव्य अंग वाले है ईश्वर ने उन्हें दिव्य शक्ति प्रदान की है। उनकी क्षमताओं को पहचान कर उन्हें शिक्षा प्रदान करना है। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी डॉ. प्रतिभा मण्डलोई ने बताया कि ऐसे बच्चों के साथ सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार किया जावे एवं दिव्यांग बच्चों के प्रति संवेदनशील बनना चाहिए।

श्रवण बाधित बच्चा जब सुन ही नहीं पाता है तो बोल भी नही पाता

सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण के मास्टर ट्रेनर संजीव सक्सेना ने बताया कि श्रवण बाधित बच्चा जब सुन ही नहीं पाता है तो बोल भी नही पाता। श्रवण बधिरता के क्या क्या कारण हो सकते है व उनसे कैसे बचा जा सकता है विस्तृत रूप से जानकारी दी।

ई.एन.टी. डॉक्टर एवं ऑडियोलाजिस्ट की मिलकर परामर्श

श्रवण बधिरता की श्रेणी बताया कि सामान्य लोग कितनी आवाज को सुनते है और श्रवण बाधित बच्चें कितनी आवाज को किस किस श्रेणी में सुन सकते है। हम कैसे सुनते हैं एवं कान की संरचना कैसे हुई है साउण्ड हमारे कान से होकर कैसे मस्तिष्क तक पहुचता है और हम कैसे रिसपांस करते है इसके बारे में बताया गया साथ ही पालकों के महत्व को बताया गया कि पालक को जागरूक होना चाहिए जैसे ही पता चलता है कि हमारा बच्चा सुन नहीं पा रहा है तो तत्काल ई.एन.टी. डॉक्टर एवं ऑडियोलाजिस्ट की मिलकर परामर्श लेना चाहिए क्योकि शीघ्र पहचान हो जाने के बाद उसको प्रशिक्षित कर उसको सही समय मे शिक्षा प्रदान की जा सकें।

भाषा, वाणी और सम्प्रेषण प्रभावित

वाणी एवं वाणी उत्पत्ति के बारे में बताया गया एवं श्रवण बाधित बच्चें को प्रत्यक्ष दिखाकर अक्षर बोलवाया गया श्रवण बधिरता होने के कारण उनकी भाषा, वाणी और सम्प्रेषण प्रभावित होता है। दैनिक दिनचर्या के शब्दावली एवं अस्पताल, पुलिस, आर्मी, इतिहास राजा रानी, यातायात के साधन, रंग, ए टू जैड, पशु पक्षी आदि के बारे में सांकेतिक भाषा में विस्तृत रूप से बताया गया।

मास्टर ट्रेनर चंद्रशेखर उपाध्याय ने प्रेरणा दायक बातो को बताया। श्रवण बाधित बच्चों के शिक्षक, पालक एवं समाज की क्या भूमिका है उसके बारे में बताया गया। शिक्षण हेतु वातावरण का निर्माण कर शिक्षा प्रदान करना है जिसमें भौतिक रूप से वातावरण, शैक्षिक वातावरण, दिव्यांग बच्चों हेतु आने जाने की व्यवस्था कैसी होना चाहिए बताया गया।

हमारे आसपास के वातारण और समाज के बारें में बताया कि ऐसे दिव्यांग बच्चों को क्या क्या परेशानी का सामना पालक को करना पडता है उसे कैसे दूर कर सकते है।

चंद्रशेखर उपाध्याय ने ग्रुप एक्टिविटी का आयोजन किया जैसे श्रवण बाधित बच्चो के लिये टी.एल.एम. निर्माण, पालको को मार्गदर्शन, बधिरता के मुख्य कारण, शिशु के जन्म के पूर्व व उसके पश्चात आवश्यक सावधानी।

प्रशिक्षार्थियों के द्वारा ग्रुप एक्टिविटी प्रस्तुतीकरण

ग्रुप को चार भाग में बांटा गया और प्रशिक्षार्थियों के द्वारा ग्रुप एक्टिविटी प्रस्तुतीकरण किया गया। इसके बाद मास्ट्रर टैनर सुरेश कश्यप ने हिन्दी वर्णमाला स्वर एंव व्यजन अ से लेकर अः एवं क से ज्ञ तक सांकेतिक भाषा में अभ्यास कराया।

प्रशिक्षण के तृतीय दिवस के अवसर पर जिला परियोजना कार्यालय से जिला सहायक कार्यक्रम समावेशी शिक्षा प्रभारी अशोक कश्यप उपस्थित हुए। प्रशिक्षार्थियो का अवलोकन एवं मूल्यांकन किया गया।

अशोक कश्यप ने बताया कि ऐसे श्रवण बाधित बच्चों को शिक्षित कर उनकी समस्या को किस तरह दूर किया जा सकता है एवं बताया कि ऐसे बच्चे का सहानुभूति की आवश्यकता नहीं है बल्कि उनके प्रति संवेदनशील बनना है।

हमें उनके अंदर छिपी हुई प्रतिभा को पहचानना है और अपने दायित्वों का निर्वहन कर एैसे दिव्यांग बच्चें सशक्त बनाना है। कार्यक्रम के सफल संचालन में विकासखण्ड स्त्रोत कार्यालय से संतोष नामदेव, अमित दुबे एवं खगेश कन्नौजे का विशेष योगदान रहा।

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