एकता की मिसाल बना सिख शख्स, रमजान महीने में मुस्लिमों को रोजा रखने में कर रहा हैं मदद

दूसरे धर्म का होते हुए भी मुस्लिमों को उनके रोजा रखने में मदद कर रहा

श्रीनगर ( मजीद) : रमजान के पवित्र महीने में एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिल रही है। एकता की मिसाल बन रहे इस शख्स का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। लोग इस सिख शख्स की तारीफ कर रहे हैं, जो दूसरे धर्म का होते हुए भी मुस्लिमों को उनके रोजा रखने में मदद कर रहा है। दरअसल, दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में सहरी (तडक़े रमजान का खाना) के दौरान अपने मुस्लिम पड़ोसियों को जगाने का काम कर रहे एक अज्ञात सिख व्यक्ति का वीडियो पर वायरल हो रहा है।

वायरल हुए इस 21 सेकंड की वीडियो क्लिप में व्यक्ति अपने पड़ोसियों को जगाने के लिए ड्रम बजा रहा है इस वीडियो को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग शेयर कर रहे हैं। ड्रम बजाने के साथ-साथ सिख व्यक्ति आवाज भी लगा रहा है, इसमें वह कह रहा है, ‘अल्लाह रसूल दे प्यारो, जन्नत दे तलबगारो, उठो रोजा रखो। सोशल मीडिया पर लोग इस सिख व्यक्ति की प्रशंसा करते हुए कह रहे हैं कि यह व्यक्ति कश्मीर में सदियों से चले आ रहे सांप्रदायिक सौहार्द को दिखा रहा है। रमजान के दौरान सहरी के लिए लोगों को जगाने का काम मोहल्ले का कोई एक व्यक्ति करता है लेकिन किसी अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है यह काम दुर्लभ तो है लेकिन नया नहीं है।

17 मई को शुरू हुआ था रमजान का महीना

बता दें कि इस बार 17 मई से रमजान का महीना शुरू हुआ। इस महीने को अल्लाह के महीने के साथ नेकियों और इबादत का महीना भी कहा जाता है। तीस दिन रोजे रखने के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद मनाई जाती है। इस महीने में रोजेदार जकात अदा करते हैं। रमजान के पूरे महीने रोजे रखना बेहद ही अच्छा माना जाता है। रोजे के दौरान सभी के लिए सलामति के लिए अल्लाह से दुआ की जाती है। इसके साथ ही कुरान पढऩा और रात में तरावीह की नमाज पढऩा अच्छा माना जाता है। इस महीने में जकात (दान) करना भी शुभ माना जाता है । जो लोग कुरान पढ़ नहीं सकते वे इसे सुन कर पुण्य लाभ ले सकते हैं।

new jindal advt tree advt
Back to top button