आजादी के बाद से ग्राम सारसमार में आज तक नहीं पहुँचे बिजली के खंभे

रोशन सोनी :

पत्थलगांव :

जशपुर जिले के पत्थलगांव में एक ऐसा गांव है जहां आजतक बिजली का खम्बा तक नहीं गड़ा है, गांव के लोग स्वयं ही लकड़ी के खंभे गाड़कर तकरीबन 2 किलोमीटर दूर तार लगाकर बिजली अपने अपने घरों तक पहुंचा रहे हैं।

लेकिन विभाग हर महीने उनके घरों तक बिजली के बिल जरुर भेज रहा है। ग्रामीण कई बार बिजली खंभे की मांग लेकर जिला कलेक्टर और विभाग के चक्कर लगाकर थक चुके हैं, लेकिन आजतक उनके गांव में बिजली के खंभे नहीं लगे है।

देखा जाए तो ये सरकार छत्तीसगढ़ को भले ही 0 सरप्लस वाला राज्य कहे लेकिन आज भी छत्तीसगढ़ में ऐसे कई गांव हैं जहां आजतक बिजली नहीं पहुंची है।

हम आज बात करते है पत्थलगांव विधानसभा अंतर्गत ग्राम पंचायत सारसमार की जहां आज़ादी के बाद से लेकर अबतक बिजली के खंभे नहीं पहुंचे हैं, ग्रामीण अपनी मांग को लेकर विभाग के कई चक्कर काटकर थक चुके हैं।

ये लोग कलेक्टर जनदर्शन में भी जा चुके हैं लेकिन आजतक उनके गांव में किसी को झांकने की फुरसत नहीं मिली, थकहार कर ग्रामीण स्वयं ही लकड़ी के खंभे बनाकर उसपर तार खींचकर अपने घरों तक बिजली पहुंचा रहे हैं।

जिससे हमेशा ग्रामीणों को जान का भी खतरा रहता है क्योंकि 1 साल पहले लकड़ी से तार टूटकर जमीन पर आ गिरा था जिसमें गांव के एक ग्रामीण सनक राम की मौत भी हो चुकी है, उसके बावजूद भी विभाग की आंख नहीं खुली और न ही किसी सत्ताधारी पार्टी के नेता ने मौकेपर जाकर उनकी समस्याओं को नहीं समझा।

बिजली विभाग ने न तो मृतक के परिजनों को मुआवजा तक नहीं दिया, विभाग ने मृतक के परिजनों से कहा कि जिस तार से सनक साय की मौत हुई है वह उन्होंने नहीं लगाया था और न ही उस गांव में उन्होंने खंभे लगाए हैं।

इसीलिए उन्हें मुआवजा नहीं मिलेगा, आज भी मृतक के परिजन इंसाफ के लिए भटक रहे हैं।

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