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Coronavirus के लिए वैक्सीन तैयार करने में सिंगापुर और भारत दे रहे हैं योगदान

कोरोना वायरस

सिंगापुर । कोरोना वायरस ने पिछले सप्ताह विश्व स्तर पर पांच मिलियन लोगों को अपने चपेट में ले लिया है, जिसकी वजह से एक वैक्सीन की खोज अधिक से अधिक जरूरी हो गई है।

कुछ सांख्यिकीविदों का कहना है कि विभिन्न देशों में प्रोटोकॉल की जांच और परीक्षण में विसंगतियों व विविधताओं के कारण केस की गिनती कम से कम 5 से 20 गुना अधिक हो सकती है। इम्पीरियल कॉलेज लंदन द्वारा प्रकाशित एक पेपर में अनुमान लगाया गया है कि यूके में 30 मार्च तक कोविड-19 से संक्रमित लोगों की संख्या 800,000 से 3.7 मिलियन के बीच थी।

तब आधिकारिक केस की गिनती सिर्फ 22,141 थी। वहीं, अमेरिका और यूरोप में गिरावट के नए मामलों के साथ, वे धीरे-धीरे अपनी अर्थव्यवस्थाओं को फिर से खोलना शुरू कर रहे हैं।

इस तरह से रोक सकते हैं बीमारी

सिंगापुर ने भी सीमित व्यवसायों और सामाजिक गतिविधियों को फिर से खोलना शुरू कर दिया है। लॉकडाउन के दौरान जो गतिविधियां बंद नहीं हुई हैं, उनमें से एक शहर-राज्य में एक वैक्सीन की खोज है जो चिकित्सा अनुसंधान के लिए इस क्षेत्र का एक प्रमुख केंद्र है।

सिंगापुर बायोटेक फर्म टाइचन ने सिंगापुर एजेंसी फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च के साथ साझेदारी में जापान की चुगाई फार्मास्युटिकल के साथ एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवा पर काम कर रही है। मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज ठीक हुए कोविड-19 रोगियों से लिए गए रक्त से प्लाज्मा का उपयोग करके काम करते हैं

जो वायरस प्रोटीन के साथ बंध सकते हैं जिससे उन्हें किसी व्यक्ति की कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोका जा सकता है। इसका उपयोग रोगनिरोधी और उपचार के लिए दोनों के रूप में किया जा सकता है।

अमेरिकी कंपनी के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा वैक्सीन

वहीं, एक और सिंगापुर की बायोटेक फर्म Esco Aster अमेरिकी कंपनी Vivaldi Biosciences के साथ एक काइमेरिक वैक्सीन विकसित कर रही है। Esco Aster का कहना है कि एक बार जब उनका टीका सभी आवश्यक परीक्षणों और अनुमोदन से गुजरता है

तो यह उत्पादन को जल्दी से बढ़ा सकता है। हालांकि, सिंगापुर में विकसित किए जा रहे टीकों में से किसी को भी बाजार में पहला टीका होने की दौड़ जीतने की उम्मीद नहीं है। यह इस बात पर निर्भर होगा कि कितनी तेजी से एक सुरक्षित और स्वीकृत वैक्सीन विकसित की जा सकती है।

इसके अलावा किस गति से वैक्सीन को बड़े पैमाने पर उत्पादित करने के लिए एक सुविधा बनाई जा सकती है और उसके बाद वैक्सीन को किस मात्रा में निर्मित और वितरित किया जा सकता है।

भारत भी पूरी तरह से तैयार

भारत की पुणे स्थित सीरम संस्थान न केवल भारत की सबसे बड़ी बायोटेक कंपनी है, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। यह वैक्सीन की सालाना 1.5 बिलियन खुराक का उत्पादन करने की क्षमता रखता है।

फ़िलहाल यह कोविड-19 वैक्सीन के उत्पादन के लिए तीन परियोजनाओं पर काम कर रहा है – एक ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ है, दूसरी अमेरिका स्थित बायोटेक कोडागेनिक्स के साथ और यह अपने स्वयं के टीके पर भी काम कर रही है।

समय बचाने के लिए यह संस्थान जोखिम उठाकर सितंबर महीने तक 20-40 मिलियन खुराक तैयार कर सकता है। हालांकि, जिन एक या अधिक टीकों पर काम किया जा रहा है, वे क्लीनिकल ट्रायल में सफल नहीं हो सकते हैं या अनुमोदित नहीं हो सकते हैं।

आमतौर पर, एक कारखाने में वैक्सीन को तभी तैयार किया जाता है, जब टीके को मंजूरी दी जाती है क्योंकि विभिन्न टीकों के निर्माण के लिए आवश्यक उपकरण व सेट-अप काफी भिन्न हो सकते हैं। इस प्रक्रिया में 6 महीने या उससे अधिक समय लग सकता है।

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