गायिका सोना महापात्र पर लगा भजन को गलत ढंग से गाने का आरोप

जागरूक नागरिक पुरी स्वर्गद्वार के सामने उनका पोस्टर जलाकर विरोध-प्रदर्शन किया गया।

भुवनेश्वर, उड़ीसा के भुवनेश्वर में जगन्नाथ भगवान पर आधारित एवं भक्त सालवेग की रचित लोकप्रिय भजन आहे नील शैल.. को गाने वाली गायिका सोना महापात्र पर भजन गलत गाने के कारण आरोप में घिर गई है।

सोना द्वारा इस भजन को गलत ढंग से गाने का आरोप लगाते हुए जागरूक नागरिक मंच की तरफ से सोमवार को पुरी स्वर्गद्वार के सामने उनका पोस्टर जलाकर विरोध-प्रदर्शन किया गया। साथ ही सिंहद्वार थाना में लिखित शिकायत करते हुए सोना से क्षमा मांगने की मांग की गई है।

जानकारी के अनुसार, मुंबई में एक कार्यक्रम में सोना महापात्र ने आहे नील शैल.. भजन को अनेक भावपूर्ण एवं अर्थोबधक शब्दों के साथ गाया था। मंच का आरोप है कि सोना महापात्र बार-बार ओड़िया संस्कृति एवं ओड़िया लोगों को हीन दृष्टि से देखती हैं।

अपने फायदे एवं पैसा कमाने के लिए वह जानबूझकर इस तरह कर रही हैं। मंच की ओर से चेतावनी दी गई है कि जब तक वह क्षमा नहीं मांगती, विरोध जारी रहेगा। मंच के नेताओं ने इस प्रकरण पर राज्य सरकार की चुप्पी पर नाराजगी जताई है।

मंच की ओर से कहा गया है कि साइवेग के नाम को सालेवेग कहकर गाने से जगन्नाथ प्रेमी भक्तों में उनके खिलाफ आक्रोश है। महाप्रभु जगन्नाथ की भजन को आधुनिक गीत न बनाने की भी मांग मंच की ओर से की गई है। मंच का कहना है कि करोड़ों जगन्नाथ प्रेमी की आस्था, मन एवं प्राण केंद्र में भक्त सालवेग की भक्ति बसती है।

मगर गायिका सोना महापात्र ने जिस ढंग से इस भजन को प्रस्तुत किया है, वह प्रभु जगन्नाथ, ओड़िया एवं ओडिशा का अपमान है। उल्लेखनीय है कि गलत ढंग से गीत गाकर विरोध का सामना करना सोना के लिए यह नया नहीं है। इससे पहले भी स्टूडियो में लोकप्रिय संबलपुरी गीत रंगबती के लिए उनकी आलोचना हुई थी

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