अब सिनेमाघरों में सात दिन पहले पहुंचेगी ‘हेलिकॉप्टर ईला’

अकेली मां और बेटे के रिश्तों पर केंद्रित है काजोल की यह फिल्म

मुंबई।

काजोल के 44वें जन्म दिन के मौके पर उनके पति और बॉलीवुड स्टार अजय देवगन ने उनकी आनेवाली फिल्म ‘हेलिकॉप्टर ईला’ का ट्रेलर लांच किया। मां-बेटे के संबंधों पर बनी इस फिल्म का काजोल के प्रशंसक लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।

पहले यह फिल्म 14 सितंबर को रिलीज होनेवाली थी। इसी दिन शाहिद और श्रद्धा कपूर की श्री नारायण सिंह के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बत्ती गुल, मीटर चालू’ (बीजीएमसी) भी सिनेमाघरों में आने वाली थी।

बॉलीवुड में वैसे ही झगड़े और अहम के टकराव कौन से कम हैं कि निर्माता—निर्देशक फिल्म रिलीज का टकराव भी मोल लें? सो, अजय देवगन ने अब यह फिल्म बीजीएमसी से सात दिन पहले ही रिलीज करने का मन बना लिया है।

काजोल की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म ‘हेलिकॉप्टर ईला’ की कहानी एक गुजराती नाटक पर आधारित है। इस नाटक को लिखा है ‘शिप ऑफ थिसियस’ जैसी फिल्म और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर ‘एन इनसिग्निफिकेंट मैन’ डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन कर चुके आनंद गांधी ने।

आनंद के इस गुजराती प्ले का नाम था- ‘बेटा कागड़ो’। इसे हिन्दी में आनंद के साथ मितेश शाह ने मिलकर लिखा है।

काजोल की इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार इसलिए हो रहा था क्योकि वर्ष 2015 में शाहरुख खान के साथ ‘दिलवाले’ में काम करने के तीन साल बाद वह किसी हिन्दी फिल्म में दिखाई देंगी।

इसकी कहानी एक सिंगल मदर और उसके बेटे के साथ उसके संबंधों पर केंद्रित है। यह फिल्म एक ऐसी मां ईला की कहानी है, जो पहले लिखती थी, गानों के वीडियो बनाती थी, खुलकर जीती थी। एक बेटा होने के बाद उसके जीवन का केंद्र वही बच्चा हो जाता है। वह अपनी पढ़ाई तक पूरी नहीं करती।

जब बच्चे को मां की छत्र-छाया में घुटन होने लगती है, तो वह मां से अपनी पढ़ाई पूरी करने को कहता है और मां ईला को भी यह बात पसंद आ जाती है। वह अपने बेटे का ही कॉलेज जॉइन कर लेती है।

बेटे को जिस बात से दिक्कत थी, वो जस की तस बनी रहती है। एक दिन वह अपनी मां पर फट पड़ता है। कहा-सुनी हो जाती है। इसके बाद कहानी कौन सा रुख करती है, यह आपको सिनेमाघरों में ही पता लग सकेगा।

बहरहाल, इस फिल्म को डायरेक्ट किया है प्रदीप सरकार ने। प्रदीप ने इससे पहले 2014 में रानी मुखर्जी की ‘मर्दानी’ फिल्म डायरेक्ट की थी। वह ‘परिणीता’ (2005), ‘लागा चुनरी में दाग’ (2007) और ‘लफंगे परिंदे’ (2010) जैसी फिल्में डायरेक्ट कर चुके हैं।

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