पहली कैबिनेट में झीरम कांड पर एसआईटी का होगा गठन – मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

कांग्रेस लगातार यह मांग कर रही थी कि यह मामला राजनीतिक षडयंत्र है, इसकी सीबीआई जांच कराई जाए।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार आ चुकी है और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के रूप में भूपेश बघेल को चुना है| मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पहली कैबिनेट में झीरम कांड पर एसआईटी का गठन किया जाएगा। छह साल बाद अब झीरम के पीड़ितों के दुखों पर मरहम लगेगा।

25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा सहित 35 लोगों को नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया था।

झीरम के पीड़ित भाजपा सरकार में सीबीआई जांच की मांग करते रहे, लेकिन सरकार ने एक न सुनी। यही नहीं, पीड़ितों ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात का समय मांगा, वह भी नहीं दिया गया।

अब झीरम कांड में मारे गये नंदकुमार पटेल के बेटे उमेश पटेल और योगेेंद्र शर्मा की पत्नी अनिता शर्मा कांग्रेस की विधायक हैं। महेंद्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा इस चुनाव में हार गई हैं, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान उनको ही हुआ था।

भाजपा सरकार ने झीरम कांड की एनआइए से जांच कराई थी। एनआइए ने राजनीतिक षडयंत्र को जांच के प्रमुख बिंदुओं में शामिल नहीं किया था।

जबकि कांग्रेस लगातार यह मांग कर रही थी कि यह मामला राजनीतिक षडयंत्र है, इसकी सीबीआई जांच कराई जाए।

कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा में जब सीबीआई जांच का दबाव बनाया, तो रमन सरकार ने पत्र लिखा, लेकिन सीबीआई ने एनआईए जांच का हवाला देकर जांच से इनकार कर दिया था।

कांग्रेस ने झीरम की जांच के लिए सड़क से लेकर विधानसभा तक लड़ाई लड़ी, लेकिन भाजपा सरकार ने एक न सुनी।

झीरम कांड के चश्मदीद हैं विधायक कवासी

झीरम कांड के चश्मदीद में से एक विधायक कवासी लखमा भी हैं। नक्सली जब नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल को गाड़ी से निकालकर जंगलों में ले गए और दोनों के हाथ बांधकर हत्या की, उस समय कवासी लखमा भी उस यात्रा में नंदकुमार पटेल के साथ थे।

कवासी किसी तरह एक पुलिसवाले की गाड़ी लेकर बचने में कामयाब हुए थे। खास बात यह है कि परिवर्तन यात्रा के संयोजक खुद टीएस सिंहदेव थे।

इन सवालों का कांग्रेसी मांग रहे थे जवाब :

राजनीतिक साजिश की जांच क्यों नहीं हुई।

कथित सीडी सामने आई थी, लेकिन उसकी जांच क्यों नहीं हुई।

परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा को अचानक क्यों हटाया गया।

रोड ओपनिंग पार्टी को क्यों हटाया गया।

वारदात के दौरान कथित रूप से नक्सली किससे बात कर रहे थे।

नक्सलियों का इतना बड़ा जमावड़ा था, तो पुलिस को खुफिया सूचना क्यों नहीं थी।

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