छह वर्षीय जैनब अमीन को इंसाफ और आरोपी इमरान अली को मिला फांसी

मजिस्ट्रेट आदिल सरवर और मृतका के पिता मोहम्मद अमीन, दोनों थे उपस्थिति

इस्लामाबादः

पाकिस्तान में छह वर्षीय जैनब अमीन के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में दोसी इमरान अली को लाहौर के कोट लखपत केंद्रीय जेल में फांसी हो गई है। मजिस्ट्रेट आदिल सरवर और मृतका के पिता मोहम्मद अमीन, दोनों की उपस्थिति में इमरान अली को फांसी दी गई है।

दोनों सुबह कोट लखपत जेल में पहुंचे थे। जैनब के अंकल भी कोट लखपत जेल मौजूद रहे। इस दौरान कोट लखपत जेल में एक एम्बुलेंस भी पहुंची थी, जिसमें दोषी के एक भाई के साथ-साथ उसके दो दोस्त भी थे।

जैनब के पिता ने किया अभार व्यक्त

अली को फांसी की सजा देने के दौरान कोट लखपत जेल के चारों ओर दंगा-निरोधक बल और पुलिस की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था थी। जैनब के पिता अमीन अंसारी ने अली की फांसी के बाद मीडिया से बात करते हुए पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश का आभार वयक्त किया और कहा कि न्याय मिला है। उन्होंने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि अधिकारियों ने फांसी की सजा का सीधा प्रसारण करने की अनुमति नहीं दी।

जेल प्रशासन ने की थी कड़ी व्यवस्था
फांसी के बाद अली के परिवार को उसका शव कसुर ले जाने के लिए सौंप दिया गया और साथ में पुलिस की एक टुकड़ी भेजी गई। जेल प्रशासन ने मंगलवार शाम को अली से 57 रिश्तेदारों की मिलने की व्यवस्था करवाई।

इस वर्ष जनवरी में हुई थी घटना

बता दें कि इमरान अली ने कसूर की एक नाबालिग लड़की को जनवरी में ट्यूशन सेंटर के रास्ते से अगवा कर लिया था। उसके गायब होने के कुछ दिन बाद उसका शव एक कचरा डंप बॉक्स में बरामद हुआ था। जांच के बाद पता चला कि लड़की का रेप कर उसे मार डाला गया था।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, नाबालिग लड़की को मारने से पहले उसके साथ कई बार बलात्कार किया गया था। इस घटना के पाकिस्तान उबल पड़ा था और कसूर सहित अन्य प्रमुख शहरों में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे। बाद में पुलिस ने इमरान अली को नाबालिग के रेप और मर्डर के मामले में अरेस्ट किया।

9 लड़कियों से रेप का जुर्म कबूला

इमरान अली ने जैनब अंसारी समेत नौ लड़कियों से बलात्कार करने का गुनाह कबूल किया था। एटीसी ने इमरान अली को नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न करने का दोषी पाया। दोषी ने पहले लाहौर उच्च न्यायालय में अपील की थी कि और कहा था कि उसे दी गई सजा रद्द कर दी जाए।

लेकिन लाहौर उच्च न्यायालय ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। उसके बाद जून में पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग के साथ क्रूर बलात्कार और हत्या के लिए इमरान अली को दी गई मौत की सजा पर मुहर लगते हुए कहा कि समाज में ऐसे लोगों को जीने का कोई हक नहीं है।

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