छत्तीसगढ़

कुशल रणनीतिकार जिला प्रभारी और विधायक रायगढ़ ने शानदार टीम वर्क के साथ किया काम

रायगढ नगरीय चुनाव 2019 में कांग्रेस का कोई बागी प्रत्यासी नही.जबकि दर्जनों भाजपा प्रत्याशियों की असल लड़ाई पार्टी के बागियों से होगी

रायगढ़: कहते है, अच्छी नियत और धैर्य से किया गया प्रयास कभी विफल नही जाता है। इस पर अगर आपको कुशल रणनीतिकार का मार्ग दर्शन मिल जाए तो भावी सफलता की तरफ आपके बढ़ते कदम और अधिक मजबूत हो जाते हैं।

जी हां रायगढ़ विधायक ने ऐसा ही कुछ कर दिखाया है, रायगढ़ नगरीय निकाय 2019 में, जहां आज के वर्तमान परिवेष की बात करें तो काग्रेस भाजपा से हर मामले में एक दो नही बल्कि पूरे दस कदम आगे दिख रही है।

चुनावी परिणाम को बुरी तरह से प्रभावित करने का माद्दा

यहाँ दस कदम का सीधा मतलब भाजपा के उन 10 बागियों से है जो पार्टी के पक्ष में आने वाले चुनावी परिणाम को बुरी तरह से प्रभावित करने का माद्दा रखते है । जबकि शुरुवाती उठा-पटक के बाद कांग्रेस विधायक प्रकाश नायक और उनकी टीम ने जिस तरह से डैमेज कंट्रोल किया है। उसकी चर्चा न केवल जिले में बल्कि राजधानी रायपुर के राजनीतिक गलियारों तक सुनी जा रही है।

दुगनी ऊर्जा के सांथ अपनी कार्यशैली में जबदरस्त बदलाव

कांग्रेस के हिसाब से आज पूरे प्रदेश में रायगढ एक मात्र ऐसा नगरीय क्षेत्र है जहां कोई कांग्रेसी बागी नही है न ही पार्टी का कोई कार्यकर्ता पार्टी प्रत्यासी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए खड़ा है। अब रही बात चुनाव परिणाम की तो विधायक रायगढ ने लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद निराश होने के बजाए दुगनी ऊर्जा के सांथ अपनी कार्यशैली में जबदरस्त बदलाव लाते हुए, इस नगरीय निकाय 2019 में शानदार तरीके से काम किया।

उनके इस प्रयास को सफल बनाने का दारोमदार अब नए कार्यकारी जिलाध्यक्ष और पार्टी प्रत्यसियों पर है।वो अपना सौ प्रतिशत परफार्मेस देते है तो परिणाम निश्चित तौर पर पार्टी के पक्ष में होगा। यद्यपि विधायक रायगढ के प्रयासों का प्रथम सुखद परिणाम सबके सामने है।

शहर में कांग्रेस पार्टी इस बार बिना किसी बागी के चुनावी रण में अपनी ताल ठोंक चुकी है। इसी के सांथ अपनी तैयारियों को विजय श्री में बदलने के लिए खुद विधायक जबरदस्त तरीके से चुनाव अभियान में लगे हुए है। जबकि भाजपाई कई खेमों में बंटे थके- हारे दिख रहे है। दूसरे शब्दों में वो अब तक डैमेज कंट्रोल की प्रक्रिया से बाहर नही आ पाए हैं।

पार्टी की सफलता की राह में बड़ा रोड़ा

इधर bjp दस दमदार भाजपाई बागियों ने पार्टी की सफलता की राह में बड़ा रोड़ा लगा दिया है। इन दस नामों पर गम्भीरता से नजर डालें तो इनमें दिनु शर्मा वार्ड क्रमांक 16,मुक्तिनाथ बबुआ वार्ड क्रमांक 30,शरद सराफ वार्ड क्रमांक 20, अशोक यादव वार्ड क्रमांक 2, गुरुचरण भट्ट वार्ड क्रमांक 38 चुनाव जितने वाले भाजपाई बागियों के नाम प्रमुखता से सामने आए है जो इस नगरीय निकाय में पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव में निर्दलीय खड़े हुए है। वही भाजपा के सीटिंग पार्षद रहे लालचंद यादव, कविता मिश्रा ने भी पार्टी अध्यक्ष के कार्यशैली से क्षुब्ध होकर अपना इस्तीफा दे चुके है।

निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी मैदान में

कुल मिलाकर यह देखा जा रहा है कि शहर के 48 वार्डों में कम-से-कम 30 वार्ड में ऐसे निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी मैदान में है जो भाजपा के पूर्व सदस्य या भाजपा में पूर्व विधायक गुट के कट्टर समर्थक रहे हैं। जूटमिल में भाजपा ने कांग्रेस या अन्य प्रत्याशियों के आगे लगभग हथियार डालने का काम किया है।

शहर के राजीनीतिक गलियारों में यह चर्चा बेहद आम हो चुकी है कि जूटमिल क्षेत्र में कुल 12 वार्डो में अब तक भारतीय जनता पार्टी के बीते चुनाव में 5 पार्षद रहे जबकि बीएसपी के 3 और कांग्रेस के 4 पार्षद चुने गए थे। लेकिन इस बार जिस तरह की गुटबाजी और पक्षपात पूर्ण ढंग से भाजपा ने टिकट बांटे गए हैं उसके आधार पर यह कह जा रहा है कि भाजपाइयों ने कांग्रेस प्रत्याशियों के सामने लगभग सरेंडर कर दिया दिया है।

भाजपाई गुटबाजी का सिलसिला यही थमने का नाम नही ले रहा आपको ध्यान होगा कि वार्ड नंबर 29 कायाघाट से बीते चुनाव भाजपा के लक्ष्मण महिलाने विजेता रहे थे। उन्होंने विधानसभा चुनाव 2018 में पार्टी के विरुद्ध काम किया था जिसके बाद उनको निष्काषित कर दिया गया था।

बीते दिनो बागियों की घर वापसी के बाद उनको भी उम्मीद थी कि उनकी भी वापसी के बाद उन्हें ही टिकट मिलेगा पर ऐसा हुआ नही। इस वार्ड से भाजपा नेता आशीष ताम्रकार के कट्टर समर्थक एबीवीपी कार्यकर्ता रामजाने भारद्वाज को टिकट मिल गया। वो …

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