छत्तीसगढ़

इंद्रावती के बहते पानी में तस्करी, अब तक 80 लाख रुपए की सागौन जब्त

बीजापुर।

छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित बस्तर की प्राणदायनी नदी इंद्रावती जहां किसानों के लिए सिंचाई का सबसे बड़ा साधन है, वहीं यह नदी बरसात के बाद इमरती लकड़ियों के तस्करों के लिए भी परिवहन का सबसे बड़ा जरिया बन जाती है।

इसी नदी के जरिये हर वर्ष करोड़ों के सागौन की लकड़ियो की तस्करी कर आंध्र, तेलंगाना और महारास्ट्र के तस्कर छत्तीसगढ़ को करोड़ों रुपयों का चूना लगाते हैं, साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

पिछले दो वर्षो में वन विभाग की सक्रियता के चलते विभाग के अफसरों ने करीब 80 लाख का अवैध सागौन बरामद कर तस्करों की कमर तोड़ दी है। विभाग ने पिछले दो वर्षो में लगातार छापे मारकर 173 घन मीटर अवैध सागौन जब्त किया है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 80 लाख बताई जा रही है।

बीजापुर के डीएफओ गुरुनाथन एन का कहना है की पिछले दो वर्षों में तस्करों पर ताबड़तोड़ कार्यवाही करते हुए तस्करों से विभाग के अधिकारी कर्मचारियों द्वारा छापा मारकर 1050 नग अवैध सागौन बरामद किया गया है। डीएफओ ने बताया कि वर्ष 2017 में 521 नग सागौन के गोले और वर्ष 2018 में 530 नग गोले बरामद किए गए जो करीब 1050 घन मीटर है।

इसकी कीमत का आंकलन सरकारी दर पर किया गया है परंतु बाजार में इसकी कीमत दोगुनी हो जाती है। इसी लालच में तस्कर यहां से अवैध रूप से सागौन की कटाई कर इंद्रावती नदी के जरिये तस्करी कर महाराष्ट्र और तेलंगाना के बाजारों या आरा मिलों में बेचते हैं।

यही नहीं बल्कि आरा मिल मालिकों के इशारे पर ही तस्कर सागौन की अवैध कटाई कर तस्करी को भी अंजाम देते हैं। तस्करों से लकड़ी की जब्ती के दौरान कई बार टीम को मुश्किलों का भी सामना करना पड़ता है, जिसके चलते कई बार वन कर्मी घायल भी हुए हैं।

डीएफओ का कहना है की तस्करों के हमलों से बचने के लिए जल्द ही वनकर्मियों को एयर गन जैसे हथियारों से लैश किया जाएगा। इंद्रावती नदी के जरिये सागौन की तस्करी के लिए तस्करों ने नायाब तरीका इजात किया है। इसके तहत वे पहले ऐसी ऊंची पहाड़ियों का चयन करते हैं जिसका ढलान इंद्रावती नदी की ओर होता है।

इसके बाद वे सागौन को काटने के बाद एक ढलान नुमा रास्ता बनाकर सागौन के गोलों को नदी में फेंकते हैं और उसके बाद एक-एक गोले को मिलाकर 10 से 15 गोलों को आपस में राफ्ट की तरह ऐसे बांध दिया जाता है ताकि उसमे 3 से 5 लोग आराम से बैठ सकें।

साथ ही राफ्ट में कैरोसीन से चलने वाला स्टोव रखकर भोजन तैयार करने की व्यवस्था भी करते हैं। जिसके बाद उसे बहते पानी में बहाकर तस्करी को अंजाम देते हैं। यही नहीं बल्कि इसमें सवार तस्कर तीर कमान जैसे हथियारों से भी लैस रहते हैं, ताकि जब वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लकड़ी जब्त करने पहुंचे तो उन पर हमला कर सके।

Summary
Review Date
Reviewed Item
इंद्रावती के बहते पानी में तस्करी, अब तक 80 लाख रुपए की सागौन जब्त
Author Rating
51star1star1star1star1star
Tags