साधना सरगम की सुरीली आवाज और सुरेन्द्र दुबे के हास्य रस से लबरेज हुए दर्शक

एसईसीएल में सांस्कृतिक संध्या सम्पन्न

बिलासपुर।

मिनी रत्न सार्वजनिक उपक्रम साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के वसंत विहार स्थित ग्राऊण्ड में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में साधना सरगम की सुरीली तान तथा सुरेन्द्र दुबे के ठहाकों ने दर्शकों का मन जीत लिया। एसईसीएल स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में दिनांक 14 जनवरी 2019 को किए गए।

इस आयोजन में एसईसीएल शीर्ष प्रबंधन के साथ-साथ बिलासपुर में पदस्थ राज्य शासन एवं रेलवे के आला अधिकारी भी उपस्थित हुए। इसमें संभागायुक्त बिलासपुर, आईजी बिलासपुर रेंज, जिलाधिकारी व एसपी बिलासपुर, एसईसीआर रेल्वे से डीआरएम व अन्य वरीय अधिकारी शामिल हैं।

एसईसीएल की ओर से सीएमडी श्री ए.पी. पण्डा, निदेशक (कार्मिक) डाॅ. आर.एस. झा, निदेशक तकनीकी (संचालन) श्री कुलदीप प्रसाद, निदेशक तकनीकी (योजना/परियोजना) आर.के. निगम, श्रद्धा महिला मण्डल की अध्यक्षा एवं उपाध्यक्षागण, विभिन्न विभागाध्यक्ष एवं बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी तथा उनके परिजन उपस्थित थे।

इस अवसर पर सीएमडी एसईसीएल एवं श्रद्धा महिला मण्डल अध्यक्षा श्रीमती पुष्पिता पण्डा, निदेशक मण्डल एवं महिला मण्डल उपाध्यक्षागणों द्वारा संयुक्त रूप से पाश्र्वगायिका साधना सरगम जी तथा कवि पद्मश्री डाॅ. सुरेन्द्र दुबे का शाल, श्रीफल द्वारा सम्मान किया गया।

साधना सरगम के सुर लहरियों पर झूमे दर्शक

सुप्रसिद्ध पाश्र्व गायिका साधना सरगम के कार्यक्रम की शुरूआत जय गणेशा…… गणेश वंदना के साथ हुई, उपरांत आ जाने जा……. कैबरे सांग प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में गायक द्वारा गुलाबी आंखें जो तेरी देखी…………. प्रस्तुत किया गया।

इसके पश्चात साधना सरगम ने स्वयं जतिन-ललित द्वारा संगीत दिए गाने चाहे तुम कुछ न कहो मैंने साथी चुन लिया….. की दिलकश प्रस्तुति दी उपरांत ए.आर. रहमान द्वारा संगीत दिए फिल्म साथिया के गीत चुपके से रात के चादर तले…….. की प्रस्तुति दी।

सुरेन्द्र के ठहाकों से दर्शक हुए लोटपोट

अपने चीर-परिचित व्यंग्य विनोद तथा हास्य रस से कवि सुरेन्द्र दुबे ने दर्शकों को खूब हॅंसाया। छत्तीसगढ़ी परम्परागत रूप को प्रयोग करते हुए उन्होंने राज्य की परम्पराओं एवं लोगों के आचार-विचार एवं भाव-भंगिमाओं के जरिए हास्य रस उकेरा वीं अपनी बेटी तथा मैं बस्तर हूॅं शीर्षक भावपरक कविताओं के जरिए दर्शकों के अंर्तमन तथा चेतना को आलोड़ित करने में सफल रहे।

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