छत्तीसगढ़

मृदा स्वास्थ्य कार्ड देते समय गुणवत्ता पर रहे विशेष ध्यान : डॉ. ठाकुर

रायपुर, (वीएनएस)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फ्लैगशिप योजना मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण के अंतर्गत राज्य के सभी किसानों को कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है। इस कार्य में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर ध्यान देकर किसानों को अनुशंसा की जानी चाहिए, ताकि किसान को इसका सही लाभ ले सके। ये बातें निदेशक विस्तार सेवाएं, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर डॉ. एम.पी. ठाकुर ने कार्यशाला में कही।

राज्य शासन के कृषि विभाग की ओर से गुरुवार को मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन स्थानीय नवीन विश्राम गृह के सभागार में किया गया था।
उन्होंने कहा कि मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड में की गई अनुशंसा के आधार पर खेती करने से उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी। इससे खेतों में खाद की अधिक और कम मात्रा दोनों स्थिति से बचा जा सकता है। भू-स्वास्थ्य का सीधा संबंध मानव स्वास्थ्य से होता है। जमीन में यदि पोषक तत्व संतुलन मात्रा में होगा तो उससे प्राप्त फसल में भी पोषक तत्व संतुलित मात्रा में विद्यमान होगा। यह स्थिति भोजन ग्रहण करने वाले मानव को स्वस्थ रखने में सहायक होगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपर संचालक कृषि डॉ. एस.आर. रात्रे ने स्वायल हेल्थकार्ड योजना अंतर्गत छत्तीसगढ़ में किये गये कार्यो पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरण के पहले चरण में लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल हुई है। इसमें मिट्टी परीक्षण और कार्ड वितरण में लगे सभी अधिकारियों-कर्मचारियों का अच्छा सहयोग रहा।

डॉ.आर. के. बाजपेयी, विभागाध्यक्ष, मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने बताया कि स्वायल हेल्थ कार्ड अंतर्गत उपलब्ध डाटा बहुत उपयोगी है। किसानों के हित में इन आंकड़ो का विश्लेषण किए जाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में राज्य सूचना विज्ञान केन्द्र से टी.एन. सिंह, तकनीकी निदेशक ने स्वायल हेल्थ कार्ड अंतर्गत मोबाईल एप तथा पोर्टल एन्ट्री के संबंध में विस्तार से सभी प्रतिभागियों को जानकारी दी।

मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के वैज्ञानिक डॉ. व्ही. एन. मिश्रा, डॉ. आलोक तिवारी, डॉ. एल. के. श्रीवास्तव, डॉ. के. टेडिया, गौरव जाटव तथा डॉ. एन. के. दीक्षित, उप संचालक कृषि, उर्वरक गुण नियंत्रण प्रयोगशाला, रायपुर ने मिट्टी स्वास्थ्य, मिट्टी नमूना विश्लेषण, मशीन उपकरण एवं रसायन उपयोग से संबंधित सभी तकनीकी पहलुओं पर प्रतिभागियों को विस्तार से बताया।

कार्यशाला में संयुक्त संचालक कृषि, उप संचालक कृषि, सहायक संचालक कृषि एवं समस्त जिलो के मृदा विश्लेषण प्रयोगशालाओं के सहायक मिट्टी परीक्षण अधिकारी, लैब टेक्नीशियन, डाटा एन्ट्री ऑपरेटर तथा राज्य के सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का समापन अवसर पर चंदन कुमार राय, सहायक संचालक कृषि द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

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