स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना की भी सीबीआई से छुट्टी, मोदी सरकार ने लिया फैसला

मोदी सरकार ने गुरुवार देर शाम राकेश अस्थाना को हटाया

नई दिल्ली: सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा के बाद अब सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को भी सीबीआई से हटा दिया है। सीबीआई प्रमुख के पद से हटाने के बाद सरकार को चौतरफा विवाद के बीच ही मोदी सरकार ने गुरुवार देर शाम यह फैसला लिया।

इससे पहले मोदी सरकार ने सिलेक्ट कमेटी की बैठक के बाद 2-1 के फैसले पर सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को उनके पद से हटा दिया था और उनका तबादला फायर सेफ्टी विभाग में कर दिया था। लेकिन आलोक वर्मा ने नई पोस्टिंग पर जाने के बजाए सेवा से इस्तीफा दे दिया था।

आलोक वर्मा ने सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी

गौरतलब है कि पिछले साल 23 अक्टूबर को सरकार ने आधी रात लिए फैसले में सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया था। आलोक वर्मा ने सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सीबीआई में बहाल कर दिया था।

लेकिन दो दिन बाद ही सरकार ने चयन समिति की बैठक बुलाई और दो दिन चली बैठक के बाद उन्हें सीबीआई प्रमुख के पद से हटा दिया था। इस समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस ए के सीकरी आलोक वर्मा को हटाने के पक्ष में थे,

जबकि लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे आलोक वर्मा को एक और मौका देना चाहते थे। लेकिन जस्टिस ए के सीकरी ने सरकार का पक्ष लेते हुए सीवीसी की रिपोर्ट के आधार पर वर्मा को उनके पद से हटाने का फैसला किया था।

सूत्रों का कहना है कि राकेश अस्थाना को सीबीआई से हटाने का फैसला उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनजर लिया गया है। सीबीआई ने राकेश अस्थाना, सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार और 2 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसमें इन तीनों पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने दिसंबर 2017 से अक्टूबर 2018 के बीच पांच बार रिश्वत ली थी।

राकेश अस्थाना 1984 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी

राकेश अस्थाना 1984 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन पर आरोप है कि उहोंने एक कारोबारी से दो करोड़ रुपए रिश्वत में लिए। इस पूरे मामले की जांच एक स्पेशल टीम कर रही है।

दरअसल सीबीआई ने मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ एक मामले को रफा-दफा करने के लिए 2 करोड़ रुपए रिश्वत लेने के आरोप में अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद अस्थाना ने कई मामलों में अपने अधिकारी आलोक वर्मा के खिलाफ रिश्वत के आरोप लगाए।

मामला धीरे-धीरे सियासी बनता चला गया और विपक्षी दलों ने इसका ठीकरा सीधा प्रधानमंत्री मोदी के सिर फोड़ा। कहा जाने लगा कि मोदी शासन में संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। मामला कोर्ट तक पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में आलोक वर्मा को बहाल कर दिया था, लेकिन चयन समिति ने उन्हें हटाने का फैसला लिया।

फिलहाल इस समय सीबीआई की कमान अंतरिम निदेशक के नागेश्वर राव के पास है। उन्हें पहले 23 अक्टूबर 2018 को अंतरिम निदेशक बनाया गया था, इसके बाद जब आलोक वर्मा को दोबारा हटाया गया तो उन्हें फिर से अंतरिम निदेशक बना दिया गया।

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