छत्तीसगढ़

रोड पर बढ़ रही हादसों की स्पीड, मानव जिंदगी में घोल रहे गमों का जहर

मनमोहन पात्रे:

बिलासपुर: बिलासपुर में सड़कों के जाल बिछ रहे हैं, ट्रैफिक वाले चौकों पर ओवरब्रिज बन गए हैं। कई स्थानों पर बिलासपुर में सड़कों को चौड़ा करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है, लेकिन सड़क हादसों का असल कारण न जाने क्यों नहीं ढूंढा जा रहा।

चुनाव गुजर गए हैं बड़े मुद्दे राजनीतिक पार्टियों ने उठाए। सड़कों व पुलों के निर्माण का भी गुणगान हुआ, लेकिन सड़क हादसों को रोकने के लिए बनाए गए सख्त कानून को लागू करने व सड़क हादसों को रोकने के लिए किसी राजनीतिक पार्टी ने प्रयास नहीं किया।

कहीं न कहीं बढ़ रहे ये सड़क हादसे मानव जिंदगी में गमों का जहर घोल रहे हैं। आज हमें इसको रोकने की जरूरत है। शहर में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार यहां रोजाना औसतन एक आदमी की जान रोड एक्सिडेंट में चली जाती है, जबकि 2 लोग घायल हो जाते हैं।

जिले में जनवरी 2018 से सितंबर 2018 तक 9 महीनों में कुल 675 सड़क हादसे हो चुके हैं। इनमें 270 लोगों की जान गई, जबकि 441 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। सर्दी में कोहरे के कारण और बारिश में सड़कें गीली होने पर यह ग्राफ और ज्यादा बढ़ जाता है।

क्या कहते हैं ट्रैफिक एडिशनल एसपी

शहर में बढ़ रहे रोड एक्सिडेंट को लेकर एडिशनल एसपी रोहित बघेल ने बताया कि लोगों का सड़क नियमों का पालन नहीं करना और जल्दबाजी भी हादसों की प्रमुख वजह है। एक तरफ शहर की सड़कों पर बढ़ रहा अतिक्रमण हादसों के लिए जिम्मेदार है तो हाइवे और एक्सप्रेस-वे पर अत्यधिक गति से वाहन चलाना भी हादसों का कारण है।

उन्होंने बताया कि पूरे बिलासपुर के एक तिहाई हादसे केवल नेशनल हाईवे पर होते हैं। यहां वाहन चालकों की ओर से गलत ओवर टेकिंग और खराब खड़े वाहन हादसों को न्योता देते हैं।

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