छत्तीसगढ़ के 500 किसानों के बने बायो फ्यूल से स्पाइसजेट प्लेन ने भरी पहली उड़ान

बेहद महंगे एविएशन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की जगह लेगा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के किसानों ने मील का पत्थर रच दिया है। यहां के 500 परिवारों की मेहनत से बने बायो फ्यूल से स्पाइसजेट के प्लेन ने उड़ान भरी, जो सफल रही। बताया जा रहा है कि टेस्ट फ्लाइट के लिए 400 किलो बायो जेट फ्यूल को विकसित किया गया था।

पहली जैव ईंधन वाली फ्लाइट ने उड़ान भरी

सोमवार सुबह देहरादून से भारत की पहली जैव ईंधन वाली फ्लाइट ने उड़ान भरी। देहरादून के जॉली ग्रांट हवाई अड्डे से 72 सीटों वाले टर्बोप्रॉप Q400 विमान ने उड़ान भरी। इस उड़ान ने यह साबित कर दिया कि बायो फ्यूल ईंधन के लिए इस्तेमाल होने वाले बेहद महंगे एविएशन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की जगह ले सकता है।

बायो-फ्यूल को छत्तीसगढ़ के 500 किसान परिवारों ने बनाया

यह सफल परीक्षण भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण कदम है। दरअसल, फ्लाइट के लिए बायो-फ्यूल को छत्तीसगढ़ के 500 किसान परिवारों ने मिलकर बनाया था। स्पाइस जेट की ओर से बताया गया कि विमान के लिए ईंधन बनाने के लिए जेट्रोफा के बीज और एटीएफ के मिश्रण का इस्तेमाल किया गया था।

विमानों का किराया होगा कम

इससे किसानों के लिए आर्थिक प्रगति के रास्ते भी खुल सकते हैं। इसके साथ ही यदि बड़े पैमाने पर इस फ्यूल का उत्पादन किया जाए, तो विमानों का किराया कम किया जा सकता है और भारतीय विमानन इंडस्ट्री को प्रतिस्पर्धी दौर में बनाए रखा जा सकता है।

पहली उड़ान देहरादून के लिए भरी

बायो फ्यूल वाली इस फ्लाइट ने सुबह 6:31 बजे देहरादून से उड़ान भरी और यह 6:53 पर वापस लौट आया। इसके नतीजे काफी सकारात्मक रहे।

स्पाइसजेट के चीफ स्ट्रेटजी ऑफिसर जीपी गुप्ता ने कहा कि प्रारंभिक अध्ययन से पता चलता है कि बायो फ्यूल नियमित रूप से विमान में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टरबाइन फ्यूल से भी बेहतर था।

टेस्ट फ्लाइट के लिए इस्तेमाल जैव ईंधन को देहरादून के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम ने विकसित किया था। इसके लिए रिनेवेबल सोर्स जैसे- एग्रीकल्चर वेस्ट, नॉन एडिबल ऑयल, म्यूनिसिपल वेस्ट आदि से मिलाकर बनाया गया है।

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