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सत्य की स्वीकरोक्ति से पारिभाषित है अध्यात्म : ईवी गिरीश

फ़िरोज़ाबाद में प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का 'स्वास्थ्य,समृद्धि और खुशी का रहस्य' कार्यशाला

शैलेंद्र गुप्ता शैली

फिरोजाबाद : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय केंद्र द्वारा आज गांधी पार्क में स्वास्थ्य,समृद्धि और खुशी के रहस्य विषय पर आयोजित कार्यशाला में मुम्बई से आए प्रोफेसर ई वी गिरीश भाई ने कहा कि वे आपको ठीक करने नहीं आए हैं और ना ही अपनी बात स्वीकार कराने के लिए आए हैं।उन्होंने बेहद सरल और सटीक भाषा में कहा कि धर्म और अध्यात्म में बहुत फर्क है ।मैं आपको आज यही फर्क समझाने आया हूं ।अगर मेरी कोई बात आपको तर्कसंगत नहीं लगे तो अधिकारपूर्वक मुझे रोक सकते हैं, टोक सकते हैं,समझा सकते हैं।

गिरीश भाई ने कहा कि सत्य को स्वीकारने से ही सच्चे अर्थों में अध्यात्म पारिभाषित होता है। अध्यात्म सत्य को पहचानता है और सत्य ही अध्यात्म है ।बहुत से भाई-बहन सत्य को स्वीकारने में संकोच करते हैं, जबकि सत्य को नकारना जीवन के सही अर्थों से पलायन करने के बराबर है। उन्होंने पैन का उदाहरण लेकर कहा कि पैन या किसी वस्तु को हम गिराते हैं तो वह नीचे गिरता है,ऊपर नहीं जाएगा। नीचे गिरना एक सत्य है ।इसे झुठलाया नहीं जा सकता ।इसी तरह सत्य का वास्तविक नाम ही अध्यात्म है।

उन्होंने कहा कि संबंधों में मधुरता तभी आएगी जब हम सब अपने अंतर्मन से सच को स्वीकार करें ।सत्य को बहुत अधिक दिन तक नकारा नहीं जा सकता, इसलिए पूर्ण जीवन जीने की कला के लिए भी सत्य की आवश्यकता है। सत्य ही एक ऐसा औजार है, जिसके सहारे आप सकारात्मक चिंतन करते हुए जीवन के आधार के गूढ़ रहस्य को समझ सकते हैं। आपके अंतर्मन में झूठ की जगह नहीं है। अंतर्मन के कहने के बावजूद आप सत्य को समझना नहीं चाहते। सच्ची खुशी सत्य ज्ञान में ही है। सत्य को हम अंतरात्मा, अंतरजगत और अंतर्मन से समझेंगे तभी आपको खुशी होगी। हमेशा मुस्कुराने की कला में आप पारंगत तभी हो सकेंगे जब आप सत्य को स्वीकार करना सीख जाएंगे ।

उन्होंने कहा कि राजयोग एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए मनुष्य अपने अंदर छुपे हीरो अथार्थ विशिष्टता को पहचान कर परिवार और समाज में मधुर संबंध को नया आयाम दे सकता है।

उन्होने कहा किसी अच्छे स्कूल में अगर बच्चे का एडमिशन हो जाए तो केवल एडमिशन मात्र से उसका भविष्य उज्ज्वल नहीं हो सकता।सफ़लता बच्चे की योग्यता पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि हमने भी प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में काफी समय पहले एडमिशन ले लिया।अभी तक प्रशिक्षण ले रहे हैं। आध्यात्मिकता का असली अर्थ मानव जीवन को आसान बनाना है.

कार्यक्रम में ईश्वरीय विश्वविद्यालय की संचालिका सरिता बहन, मेयर नूतन राठौर, देवीचरन अग्रवाल, शंकर गुप्ता,राज धाकरे,सीए राकेश गोयल, जी के शर्मा ,ईश्वरीय विश्वविद्यालय की खुशी बहन,अंजना बहन,रिंकी बहन,सपना बहन और वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र गुप्त शैली सहित शहर के अनेक प्रतिष्ठित समाज सेवी उद्योगपति,शिक्षाविद तथा भाई बहन उपस्थित थे.

प्रोफेसर गिरीश भाई कल 8 अप्रैल को प्रातः साढ़े छह से आठ बजे तक कार्यशाला में स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशी के रहस्य संबंधित ऐसे टिप्स पर चर्चा करेंगे,जिससे आपका मन सत्य को अपनाते हुए खुशहाल रह सके। ज्ञातव्य हो कि गिरीश भाई पिछले 18 सालों से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़े रहकर राजयोग के माध्यम से विभिन्न संस्थाओं में कार्यशाला आयोजित कर सत्य,अध्यात्म और स्वास्थ्य की परिभाषा को बारीकी से समझाते हैं.

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