छत्तीसगढ़

अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावना मृत संघ (ISKCON) बिलासपुर शाखा द्वारा श्री कृष्ण जन्माष्टमी महा महोत्सव मनाया गया

ब्युरो चीफ : विपुल मिश्रा

छत्तीसगढ़ /बिलासपुर: बिलासपुर के बैनर तले। श्री! कृष्ण जन्म! महा महोत्सव मनाया गया। कोरोना बीमारी के कारण। इस वर्ष भव्य जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन नहीं किया जा सका है। केवल एक छोटा सा कार्यक्रम सीमित भक्तों की उपस्थिति में धूमधाम से। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ संपन्न करवाया गया।

मंत्र उच्चारण के बीच भगवान श्री श्री राधा मदन मोहन जी का आगमन इस्कॉन बिलासपुर के प्रचार केंद्र में हुआ भगवान का महा अभिषेक किया गया बाद में सु मधुर हरे कृष्णा। महामंत्र संकीर्तन हुआ। इस कार्यक्रम में कानपुर इस्कॉन से आए वरिष्ठ ब्रह्मचारी पूज्य श्री कुर्मावतार दास प्रभु जी ने भगवान के जन्म की कथा का पाठन किया।

कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर इस्कॉन प्रचार केंद्र को खूब सजाया गया भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में श्रद्धालु लीन रहे। महाभिषेक के पश्चात! भगवान श्री श्री राधा मदन मोहन जी का भव्य श्रृंगार किया गया। मंत्रोच्चारण के बीच भगवान श्री कृष्ण का पूजन हुआ। इसके बाद मंगल आरती हुई।

सीमित संख्या में श्रद्धालुओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। मंदिर में पूज्य श्री कुर्मावतार दास प्रभु जी ने भक्तों को श्री कृष्ण “कथा सुनाई, उन्होंने कहा, भगवान धरा पर आप और अनाचार मिटाने के लिए अवश्य अवतार लेते हैं। भगवान के अवतार लेते ही सब बंधन खुल जाते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावना मृत संघ (ISKCON) बिलासपुर शाखा द्वारा श्री कृष्ण जन्माष्टमी महा महोत्सव मनाया गया

कथा को सुन भक्त भावविभोर

भगवान की भक्ति कभी निष्फल नहीं होती। सच्चे मन से भगवान को पुकारे तो वह दौड़े चले आते हैं और भक्तों की अवश्य मदद करते हैं। श्री कृष्ण के “कथा को सुन भक्त भावविभोर हो गए।

अपने आराध्य के अवतरण की खुशी में श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गाए तो युवा भक्तों ने खूब ठुमके लगाए। इस्कॉन के सदस्य मृदंग की थाप के बीच हरे कृष्ण हरे रामा की अमृत धुन पर झूमते रहे। भगवान कृष्ण के जयकारों की गूंज रही।

कार्यक्रम को मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के निर्देशों का पालन करते हुए धूमधाम से संपन्न कराया गया। कार्यक्रम से पूर्व परिसर को पूर्णता सैनिटाइज किया गया। सभी भक्तों को निर्देश दिया गया था। कि मास्क लगाकर आएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

कार्यक्रम में उपस्थित भक्तगण जिनमे मुख्य रूप से यदुरानी देवी दासी माता जी। श्री जीवगोरस्वामी स्वामी प्रभु जी! आदि केशव प्रभु जी रोहित प्रभु श्री धनंजय प्रभु जी आशीष प्रभु जी। सनी प्रभु, रोमिर गोयल प्रभु, जयंत प्रभु, दुर्गेश प्रभु जी आदि मुख्य रूप से सम्मिलित रहे।

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