परसदा में भगवान श्री राम लीला का मंचन कार्यक्रम

मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत परसदा में भगवान श्री राम लीला का मंचन कार्यक्रम लगातार आज पांचवा दिन था

ब्युरो चीफ : विपुल मिश्रा

संवाददाता : राधिका पाखी

मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत परसदा में भगवान श्री राम लीला का मंचन कार्यक्रम लगातार आज पांचवा दिन था जिसमें भगवान श्री राम कथा सुनने श्री रामलीला देखने भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष चंद्र प्रकाश सूर्या साथ में रेलवे युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष मुकेश राव महममद पूर्व सरपंच एवं मंडल उपाध्यक्ष भी साथ में शामिल हुए..

सभी ने श्री रामलीला का भरपूर आनंद लिया आज के रामलीला में सूत्रधार ने बताया कि आज राम जी का वनवास गमन होना है और अंत में श्री राम के पिता महाराज दशरथ जी का अपने इस मानव शरीर को त्याग करना है। भगवान श्री राम की आरती कर सभी दर्शकों को चंद्र प्रकाश सूर्या ने भगवान श्री राम के मर्यादा पुरुषोत्तम बनने तक की बातें रखी चंद्र प्रकाश सूर्य ने बताया कि भगवान श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम कैसे बने उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम का धैर्य देखिए अयोध्या में युवराज श्री राम की राजतिलक की तैयारी चल रही है चारों तरफ नगाड़े बज रहे हैं महल को सजाया गया है

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वस्त्र आभूषण नए नए कपड़े पहने श्री राम चारों तरफ श्रीराम के नाम की गूंज ,गूंज रही है अचानक से श्री राम को बुलावा आता है और पिता दशरथ जी सिर पर हाथ रखे हुए व्याकुल मुद्रा में बैठे हुए हैं श्रीराम उनको देखकर पूछते हैं कि क्या बात हुई तो उनकी माताजी कहती है कि आपको 14 वर्ष का वनवास दिया गया है ,मानव रूप में श्री राम हंस कर कहते हैं बस इतनी सी बात कल्पना कीजिए एक तरफ युवराज के राजतिलक की इतनी बड़ी तैयारी और दूसरी तरफ अचानक से 14 वर्ष के लिए वनवास उसके बाद भी श्री राम माथे पर शिकन नहीं ना युवराज बनने की खुशी और ना 14 वर्ष का वनवास जाने का दुख यही तो है

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम श्री राम जब तक अयोध्या में रहे युवराज राम कहलाए और जब 14 वर्ष का वनवास पूरा कर वापस अयोध्या लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कहलाए,भगवान श्री राम जब वनवास के लिए निकले कई तरह की कठिनाई आई यहां तक की माता सीता का भी हरण हो गया भगवान श्रीराम ने धैर्य रखते हुए माता सीता की खोज में निकले एक ऐसा परिवार जिनके पूर्वजों में बड़े-बड़े नाम बड़े-बड़े राजा महाराजा इशयकु,

महाराजा पूर्वा, महाराजा नहुष, महाराजा ययाति, महाराजा नाभास, महाराजा सगर महाराजा अंशुमान महाराजा दिलीप महाराजा रघु महाराजा अज महाराजा दशरथ और जिनके नाम से इस देश का नाम भारत पड़ा महाराजा भरत ऐसे परिवार का पुत्र की पत्नी का अपहरण हो जाए और बाकी राजाओं को पता ना चले ऐसे कैसे हो सकता है रास्ते में बहुत सारे राजाओं महाराजाओं ने श्री राम को साथ चलने के लिए निश्चित रूप से आग्रह किए होंगे कई राजाओं ने उनकी मदद के लिए प्रस्ताव भेजा होगा

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लेकिन श्रीराम ने उनकी सहायता न लेते हुए उन्होंने दलितों को साथ रखा उन्होंने पिछड़ों को साथ रखा उन्होंने केवट को साथ रखा मल्लाह को साथ रखा उन्होंने महा प्रतापी बाली जैसे योद्धाओं को साथ में नहीं रखा उन्होंने सुग्रीव को साथ रखा वानरों को अपने साथ रखा वे चाहते तो महाराज शूरवीर बाली को अपने साथ रख सकते थे। हम सबको मालूम है की बाली ने पराक्रमी रावण को हरा दिया था उसके बाद भी उन्होंने धर्म का साथ दिया क्योंकि बाली ने सुग्रीव की राज पाठ छीन लिया था उनके परिवार के साथ अन्याय किया था श्री राम माता शबरी के जूठे बेर खाए और उनसे मिले हर जगह श्री राम की परीक्षा लिया गया।

ऐसा कोई जगह नहीं जहां मानव रूप में उनका परीक्षा ना लिया गया हो उनके साहस का परीक्षा ना लिया गया हो उनके धैर्य का परीक्षा ना लिया गया । हम सबको श्रीराम से सीखनी चाहिए कि उन्होंने किष्किंधा और श्रीलंका जैसे राज्य को जीतने के बाद भी उन पर कब्जा नहीं किया आज पांच सौ सात सौ रुपये के लिए लोग मरने मारने पर उतारू हो जाते हैं रामायण से हमें कई बातें सीखने मिलती है जैसे विद्या जितना ज्यादा हो ज्यादा से ज्यादा प्राप्त करनी चाहिए क्योंकि शिक्षा सफलता की कुंजी है शिक्षा से ही जीवन का सार है। शुभ कार्य जितना जल्दी हो कर लेना चाहिए, और गलत कामों को हमेशा के लिए टाल देना चाहिए।

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रामायण हमें सिखाती है कि निष्ठा एवं धैर्यवान बने आजकल के बच्चों में धैर्य नहीं है बहुत जल्दी अग्रेसिव हो जाते हैं या फिर डिप्रेशन में चले जाते हैं। इस पर भी हमें विचार करनी है अपने माता पिता की आज्ञा का पालन करना चाहिए क्योंकि माता-पिता आपको हमेशा सही राह दिखाएंगे ।कभी अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि रावण इतना बड़ा ज्ञानी होते हुए भी सिर्फ अहंकार के चलते उनका सारा राजपाट चला गया। कभी किसी को कमजोर नहीं समझना चाहिए अपने परिवार में कभी लड़ाई झगड़ा नहीं करनी चाहिए और अपनी गलती को समय रहते सुधार लें यही रामायण हमें सिखाती है

यही रामलीला हमें सिखाती है आज के इस कार्यक्रम में श्री राम की भूमिका में परसदा निवासी अरुण सिंह ठाकुर ,भाई लक्ष्मण की भूमिका में संतोष साहू प्रमुख किरदार निभाए साथ में परसदा से ठाकुर मनीष सिंह भारत केवट, सनत साहू, संतोष निरणेजक, के के निरणेजक मिलाप राम जी, खोल बहरा जगत, प्रहलाद साहू ,भगउराम ,गोविंद यादव, सुरेश साहू ,परसराम निर्देशक, दुर्गेश देवांगन, शिवम श्रीवास, जय किशन साहू, सोनू सिदार राजकुमार मरकाम, और हजारों की संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे जय जय श्री राम..

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