प्रदेश कांग्रेस विधि विभाग के अध्यक्ष संदीप दुबे ने अटल श्रीवास्तव के पर्यटन निगम के अध्यक्ष बनने पर बधाई दी

अटल से पर्यटन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को भारत के नक्शे में लाने की महती जिम्मेदारी के साथ राम गमन पथ को शीघ्र पूरा करने की उम्मीद जताई

बिलासपुर- प्रदेश कांग्रेस विधि विभाग के अध्यक्ष संदीप दुबे ने अटल श्रीवास्तव के पर्यटन निगम के अध्यक्ष बनने पर बधाई दी और उम्मीद जताया कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की असीम संभावना को देखते हुए प्रकृति प्रेमी अटल श्रीवास्तव से बहुत उम्मीदें है साथ ही साथ राज्य की महत्वाकांक्षी राम गमन पथ को भी शीघ्र पूरा करने की बात की है। दुबे ने प्रमोद नायक को जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष बनने भी बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि सहकारिता के क्षेत्र में बहुत कार्य करने की उम्मीद जताई। साथ मे कांग्रेस विधि के महामंत्री हिमांशु शर्मा एवम कृष्णा देवांगन भी साथ थे।

अटल से पर्यटन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को भारत के नक्शे में लाने की महती जिम्मेदारी के साथ राम गमन पथ को शीघ्र पूरा करने की उम्मीद जताई- संदीप दुबे अध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस विधि
झीरम घाटी हत्याकांड में दरभा थाने में दर्ज आपराधिक प्रकरण को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार के वकील ने बहस के लिए एक बार फिर से समय ले लिया। इस पर हस्तक्षेप याचिकाकर्ता की तरफ से आपत्ति की गई। बार-बार समय लेने पर हाई कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई। हालाकि, मामले की सुनवाई 12 अगस्त तक बढ़ा दी है,राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआइए) ने हाई कोर्ट में राज्य शासन द्वारा झीरम घाटी कांड में दरभा थाने में दर्ज आपराधिक प्रकरण के खिलाफ अपील की है। दरअसल, इस प्रकरण में एनआइए की जांच पूरी होने के बावजूद झीरम कांड में दिवंगत कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक उदय मुदलियार के पुत्र जितेंद्र मुदलियार ने जून 2020 में दरभा थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई है। उनकी रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा 302 और 120 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। रिपोर्ट में बताया है कि यह जघनय हत्याकांड राजनीतिक षडयंत्र का हिस्सा है।

लेकिन, एनआइए ने इस घटना में राजनीतिक षड्यंत्र की जांच नहीं की है। दरभा थाने में दर्ज रिपोर्ट को चुनौती देते हुए एनआइए ने अपनी विशेष अदालत में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इस फैसले के खिलाफ एनआइए ने हाई कोर्ट में आपराधिक अपील प्रस्तुत की गई है। इसमें कहा गया है कि एनआइए केंद्रीय स्तर की जांच एजेंसी है, जिसकी जांच हो चुकी है। ऐसे में राज्य शासन को अधिकार नहीं है कि फिर से उसी प्रकरण में अपराध दर्ज कराई जाए।

इस मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने पुलिस द्वारा आपराधिक प्रकरण की जांच पर रोक लगाई है। इधर इस मामले में जितेंद्र मुदलियार ने हाई कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है। इसमें बताया है कि झीरम हमला सामान्य नक्सली घटना नहीं है। बल्कि इसे राजनीतिक षड्यंत्र के तहत अंजाम दिया गया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस मनिंद्र श्रीवास्तव व जस्टिस विमला कपूर की बेंच में चल रही है।

मंगलवार को प्रकरण की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से असिस्टेंट सालिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने यह कहते हुए समय मांगा कि अतिरिक्त सालिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में किसी दूसरे प्रकरण में व्यस्त हैं। इसके चलते बहस के लिए समय मांगा। इस पर हस्तक्षेप याचिकाकर्ता के वकील सुदीप श्रीवास्तव व संदीप दुबे ने आपत्ति की और कहा कि प्रकरण लंबे से चल रही है।

हाई कोर्ट से एनआइए के पक्ष में स्थगन है। ऐसे में अंतिम सुनवाई जरूरी है। कोर्ट ने भी केंद्र के जवाब के लिए समय मांगने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने राज्य के उपमहाधिवक्ता मतीन सिद्क्वि ने समय लिए जाने का विरोध नही किया,कोर्ट ने ज्यादा समय देने के बजाए मामले को 12 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया है।
झीरम मामले की सुनवाई केंद्र सरकार के वकील के समय लेने पर आगे बडी, हाई कोर्ट नाराज, अगले पेशी में अंतिम सुनवाई होकर रहेगी ,अब समय नही दिया जाएगा।

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