छत्तीसगढ़

राज्य सरकार पीपीपी मोड के नाम शासकीय अस्पतालो को बेच रही है – डाॅ. राकेश गुप्ता

रायपुर : वेदांता के केंसर अस्पताल मामले में राज्य सरकार पर हमला करते हुये चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने कहा है कि वेदांता कैंसर अस्पताल ने भी रियायती दरों पर इलाज करने में असमर्थता जताई थी। 10 सालों में तैयार अस्पताल का पूर्ण व्यवसायीकरण कर दिया है। पहले गरीबों का इलाज, केंसर का इलाज करने के नाम पर 1 रू. फीस में जमीन देकर वाहवाही बटोरी गयी। फिर अब 34 करोड़ का जुर्माना लगाने की बात करके क्या उन गरीबो से वेदांता की वसूली को राज्य सरकार ने जस्टिफाई नहीं किया है?

वेदांता को बाल्को प्लांट की खरीदी के समय से ही भाजपा सरकार फायदा पहुंचती रही है। वेदांता को पहले जमीन शासन द्वारा नया रायपुर में निर्धारित दरो पर दी जा रही थी, लेकिन वेदांता अस्पताल प्रशासन के चेरीटेबल अस्पताल चलाने के आश्वासन पर पूरी जमीन दो किस्तो में अति रियायती दरों पर एक रूपये के लीज रेंट पर दी गयी थी। 10 वर्षो के लंबे अर्से के बाद अस्पताल के रूप में तैयार होने पर वेदांता इसे चेर्रीटेबल अस्पताल चलाने के वादे से मुकर गया।

इस बीच अस्पताल शुरू करने में विफल होने पर जमीन वापस लेने की धमकी भी राज्य शासन द्वारा दी गयी थी। मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह की सरकार ने वेदांता केंसर हाॅस्पिटल के मुद्दे पर आत्मसमपर्ण कर दिया है उससे ऐसा लगता है कि यह राज्य सरकार का असली चरित्र है। स्वास्थ्य के मामले में गरीबो के हक को मारने वाले अस्पताल के उद्घाटन में मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह का जाना ये अपने आप में अभयदान है खुली लूट की छूट है हम इसकी निंदा करते है ।

कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुये चिक्तिसा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डाॅ. राकेश गुप्ता ने कहा है कि मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह को कांग्रेस फिर से चेतावनी देती है कि पीपीपी मोड पर लाभ पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को गिरवी रखने की कार्यवाही पर तुरंत रोक लगाये। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल चेतावनी दे चुके है कि हम सदन से सड़क तक हम गरीब आदमी के स्वास्थ्य लिये लड़ाई लड़ेगे। इसके लिये हम आंदोलन भी करेंगे और जिस प्रकार ये लगातार घटनाक्रम लगातार प्रदेश के सभी अस्पतालो को बचने का हो रहा है, कांग्रेस इसकी विरोध करती है।

प्रमुख सचिव अजय सिंह स्वास्थ्य सचिव सुब्रत साहू की उपस्थिति में स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख अधिकारियों को 9 चिन्हित शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पीपीपी मोड पर दिए जाने की गाइड लाइन तैयार करने का निर्देश देते हैं। क्या इस तरह के निर्णय के लिये मत्रिमंडल से सहमति ली गयी है? भारतीय संविधान में आवश्यक कल्याणकारी राज्य की के प्रारूप में स्वास्थ्य को निजी क्षेत्र को सौंपने के निर्णय लेने में हाल के सत्र में विधानसभा पटल पर रखकर जनप्रतिनिधियों को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया? रमन सिंह के विकास मॉडल में गरीबों की शिक्षा और स्वास्थ्य क्यों गायब है?

डाॅ. राकेश गुप्ता ने कहा कि पीपीपी मोड पर स्वास्थ्य विभाग में यह तीसरा प्रयोग है जबकि इसके पहले दो प्रयोग एस्कार्ट और आयुष्मान विफल हो चुके है। हमारा दावा है जितने भी अस्पताल राज्य सरकार बेचेगी वहां कमीशन खोरी को ही बढ़ावा मिलेगा।

इसको सही अर्थो में लिया जाये तो ये पीपीपी मोड नहीं है ये अस्पताल बेचे जा रहे है। कमीशनखोरी पर हो रही है और जिस प्रकार बेशर्मी से अधिकारी और मंत्री ये कह रहे है कि हम अस्पताल चलाने में सफलता प्राप्त करेगी और अपने आप में जनता के साथ धोखा है और सबसे प्रमुख आपत्तिजनक बात तो यह है कि नीति गत घोषणायें अधिकारी कर रहे है पिछले चार दिनों से मंत्री अजय चंद्राकर जी का कोई बयान नहीं आया तो यह सत्य हो जाता है।

नीतिगत निर्णय को कौन लोग इम्प्लीमेंट कर रहे है? जिस स्वास्थ्य सचिव का 15 दिन के बाद कार्यकाल समाप्त होने वाला है, वह जिस प्रकार के नीतिगत निर्णय ले रहा है? यह दुर्भाग्य जनक है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सरकार में स्वास्थ्य और शिक्षा का मामला जो जनकल्याणकारी रूप से होना चाहिये, वो नहीं हो रहा है यह दुर्भाग्य जनक है।

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