450 साल की परंपरा तोड़ यहां अखाड़े में बेटियां

वाराणसी: यूपी में वाराणसी स्थित तुलसीदास अखाड़े ने 450 वर्षों की पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए इसमें लड़कियों को जगह दे दी है।

नंदिनी सरकार और आस्था वर्मा नाम की दोनों लड़कियों को इस अखाड़े में प्रवेश के लिए अनुमति मिल गई है। अखाड़े का यह कदम बड़ा प्रभावकारी और क्रांतिकारी माना जा रहा है।

नंदनी सरकार और आस्था वर्मा ने अखाड़े में जाने के लिए कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार वाराणसी के महंत को राजी कर लिया।

महंत ने दोनों लड़कियों की मेहनत और लगन को देखते हुए यह फैसला लिया। उनकी अखाड़े में एंट्री से पहले परीक्षा हुई।

दोनों लड़कियों को गंगा के किनारे तुलसी अखाड़े में मिट्टी से सनकर हुए पहलवानी के दांव-पेंच दिखाने पड़े।

दोनों महिला पहलवानों ने ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष के साथ कुश्ती के दांव-पेच दिखाकर सभी को अपना मुरीद बना लिया।

भगवान हनुमान को समर्पित है यह अखाड़ा

तुलसी अखाड़े की खास बात यह है कि इसका संचालन संकट मोचन मंदिर ट्रस्ट करता है। इस मंदिर के महंत द्वारा लड़की को कुश्ती करने के लिए अनुमति देना बड़ी बात है। इस जगह पर लड़कियों का प्रवेश वर्जित था। यह अखाड़ा भगवान हनुमान को समर्पित है।

तुलसी अखाड़े में लड़कियों के प्रवेश के बाद अब दूसरी लड़कियों में भी हिम्मत दिखने लगी है। आपको बता दें कि 20 साल की नंदनी सरकार कुश्ती में स्नातक कर रही हैं।

अखाड़े में लड़कियों के प्रवेश करने को लेकर महंत को दस वर्षों से मनाया जा रहा था।

महंत की अनुमति के बाद अखाड़े में इस साल 15 अगस्त को नागपंचमी के दिन लड़कियों को उतरने का मौका मिला था। अखाड़े में अब दिवाली से महिलाओं की कुश्ती का आयोजन होने वाला है।

अनुमति मिलने से उत्साहित नंदिनी सरकार ने कहा कि परंपरागत पहलवानों का प्रशिक्षण तब तक अधूरा ही रहता है जब तक वह किसी अखाड़े की मिट्टी को नहीं छू लेते।

अंतत: हमें यह मौका मिल गया। हमारे गुरु सुरेंद्र दव और गोरखनाथ यादव ने महंत को मनाने का महत्वपूर्ण काम किया।

जब बनारस के सांसद प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो बनारस की महिला पहलवान क्यों न देश को लीड करे। पहलवान कोच सुरेंद्र ने बताया कि दोनों लड़कियों की अखाड़े में एंट्री भगवान की इच्छा है।

सपना पूरा करने की ख्वाहिश

संकट मोचन विश्वम्भर नाथ मिश्रा का भी मानना है कि इस फैसले से महिलाओं को कुश्ती के क्षेत्र में आगे आने का मौका मिलेगा। यह अच्छा फैसला है लड़कियों के हित में।

लोगों को आश्चर्य हुआ था जब उन्हें यह पता चला कि मैं आईआईटी में प्रफेसर के साथ ही मंदिर में महंत भी हूं तो वे चकित रह गए।

मुझे लगता है कि मैं समाज के लिए एक महंत और प्रफेसर दोनों रूप में काम कर सकता हूं। महंत बीएचयू में आईआईटी इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रफेसर हैं।

नंदिनी और आस्था दोनों अब पहलवानी के लिए यूपी का नेतृत्व करेंगी। इसके लिए तुलसी अखाड़े में उनका अभ्यास शुरू हो चुका है। वहां सारे उपकरण मौजूद हैं।

दोनों लड़कियों ने भाला और गदे से प्रशिक्षण शुरू कर दिया है।

पहलवानी में नंदिनी को धोबी पाट और आस्था कालजंग पसंद है। दोनों लड़कियां साधारण परिवार से हैं। नंदिनी के पिता अस्सी घाट में मिठाई बेचते हैं और आस्था के पिता का स्वर्गवास हो चुका है।

उनकी मां मधु वर्मा केदार घाट पर फूल बेचती हैं। दोनों ही परिवार अपनी बेटियों का सपना पूरा करने की ख्वाहिश देख रही हैं।

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