आतंकी संगठनों की रुके मदद : डॉ. एस. जयशंकर, विदेश मंत्री

ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में अफगानिस्तान पर आयोजित एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भारत का पक्ष रखा, जहां अफगानिस्तान एक स्वतंत्र तटस्थ एकीकृत शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और समृद्ध राष्ट्र के तौर पर अस्तित्व में आया।

ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में अफगानिस्तान पर आयोजित एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भारत का पक्ष रखा, जहां अफगानिस्तान एक स्वतंत्र तटस्थ एकीकृत शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और समृद्ध राष्ट्र के तौर पर अस्तित्व में आया।

शंघाई सहयोग संगठन के प्रमुख उद्देश्य को लेकर की अहम टिप्पणी
सदस्य देशों की बैठक में भारत का यही स्पष्ट संदेश रहा कि आतंकवाद और उग्रवाद से मुकाबला शंघाई सहयोग संगठन का प्रमुख उद्देश्य है और आतंकी संगठनों को दी जाने वाली आर्थिक मदद को रोकने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

अफगानिस्तान के भविष्य को लेकर रखा भारत का पक्ष
दुशांबे में अफगानिस्तान पर आयोजित एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अफगानिस्तान के भविष्य को लेकर भारत का पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर देते हुए कहा कि विश्व, क्षेत्र और अफगानिस्तान की आवाम सब यही चाहते हैं।

पड़ोसी देशों को आतंकवाद के खतरे से बचाए जाने को लेकर बोले विदेश मंत्री
एक स्वतंत्र, तटस्थ, एकीकृत, शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और समृद्ध राष्ट्र नागरिकों और राज्य के प्रतिनिधियों के खिलाफ हिंसा और आतंकवादी हमलों पर विराम लगाना, राजनीतिक बातचीत के माध्यम से संघर्ष को सुलझाना और जातीय समूहों के हितों का सम्मान करने के साथ, पड़ोसियों को आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खतरे से बचाना सुनिश्चित किया जाए।

दुनिया हिंसा और बल द्वारा सत्ता हथियाने के खिलाफ
इसके अलावा विदेश मंत्री ने कहा अफगानिस्तान में बहुत अलग एजेंडे के साथ काम करने वाली ताकतें हैं, इसलिए सबसे बड़ी चुनौती इनके खिलाफ गंभीरता और ईमानदारी से कार्य करने की है। उन्होंने तालिबान की हिंसा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि दुनिया हिंसा और बल द्वारा सत्ता हथियाने के खिलाफ है और इस तरह की कार्रवाइयों को अवैध माना जाएगा।

शांति वार्ता ही अफगानिस्तान मामले का एकमात्र हल
विदेश मंत्री ने एक बार फिर जोर देते हुए कहा कि ईमानदारी से शांति वार्ता ही अफगानिस्तान मामले का एकमात्र हल है। अफगानिस्तान का भविष्य फिर से उसका अतीत नहीं हो सकता। एक पूरी नई पीढ़ी की अलग-अलग उम्मीदें होती हैं, हमें उन्हें निराश नहीं करना चाहिए।

विदेश मंत्रियों की एससीओ परिषद ने 20 साल किए पूरे
भारत कई बार साफ कर चुका है कि वह एक स्वतंत्र, संप्रभु, एकजुट और लोकतांत्रिक अफगानिस्तान के लिए प्रतिबद्ध है। अफगानिस्तान में किसी भी सरकार के पास इसके लिए वैधता का पहलू जरूरी है। वहीं बताना चाहेंगे कि विदेश मंत्रियों की एससीओ परिषद ने अपने 20 साल पूरे कर लिए हैं।

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